फ्रांस की एक राजनेता ने कहा है कि हलाल मीट पर टैक्स के जरिए फ्रांस की मस्जिदों को फंडिंग की जानी चाहिए।

ब्रिटिश अखबार ‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस की सेंटर-राइट पार्टी ‘द रिपब्लिकन्स’ में एक जानी मानी नेता नताली कुशियोस्को- मोरिजे़ट की यह राय है। उनका कहना है कि नागरिकों का अपने धर्मों को फंड करने के लिए एक तरीका ढूंढ़ना ‘उचित’ है। नताली ने कहा कि हलाल मीट पर एक फीसदी टैक्स से फ्रांस में मस्जिदें बनाने के लिए 60 मिलियन यूरो (करीब 4.48 अरब रुपए) जुटाए जा सकते हैं। बता दें, ‘हलाल मीट’ को इस्लाम में पवित्र माना जाता है।

निकोलस सरकोज़ी की पूर्व में प्रवक्ता रह चुकी नताली ने अपनी नई किताब में यह सुझाव दिया है। उन्होंने कहा, “आप इस उत्पाद का उपभोग करते हैं, जिसका एक धार्मिक पहलू है। साथ ही पैसा धर्म को फाइनैंस करने के लिए जाता है। मेरा मानना है कि सभी के लिए अपने धर्म को फाइनैंस करने के लिए एक तरीका ढूंढ़ना उचित है।”

उन्होंने साथ ही कहा कि कैथोलिक चर्च पारसियों के दान पर निर्भर रहते हैं। जिससे वे अपना अस्तित्व बनाए रख सकें। ऐसा ही फ्रांस की मस्जिदों के संदर्भ में भी सच हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश की मस्जिदों के बाहर कई मुस्लिमों ने फंडिंग की कमी और पूज्य स्थल पर स्थान की कमी के चलते विरोध प्रदर्शन किए हैं। इसको लेकर कुछ राजनेताओं ने कहा है कि पूजा के लिए प्रतिष्ठित स्थान की कमी के चलते कुछ मामलों में ‘चरमपंथ’ को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, फ्रांस को सेकुलर राष्ट्र का दर्जा मिला हुआ है। जहां राष्ट्र और धर्म को अलग रखा जाता है। लेकिन फंडिंग बढ़ने की चर्चा से वहां तनाव बढ़ गया है।

फ्रांस में तनाव तब बढ़ गया जब फ्रांस के 60 लाख मुस्लिमों में से कुछ ने सवाल उठाया कि क्या खाली चर्चों को कन्वर्ट किया जा सकता है? आंकड़ों के मुताबिक, जबकि, फ्रांस के ज्यादातर लोग अपने आपको कैथोलिक मानते हैं। लेकिन उनमें से कुछ ही नियमित रूप से सर्मन्स को अटैंड करते हैं।

गौरतलब है, पूरे हिजाब पर प्रतिबंध को देश के इस्लामी समुदाय के खिलाफ एक कदम के तौर पर देखा गया था। दूसरी तरफ हलाल मीट की उपलब्धता की दक्षिणपंथी समूहों की तरफ से आलोचना की जा रही है। (News24)


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