तमिलनाडु के करूर जिले में स्थित पल्लपति के रहने वाले मुहम्मद रिफत शारूक़ ने अपनी छोटी सी उम्र में वो कारनामा कर दिखाया हैं. जिससे मिसाइल मैन और देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आज़ाद के बचपन की यादें एक बार फिर से ताज़ा हो गई हैं.

कक्षा बारहवी में पड़ने वाले रिफत शारूक़ ने प्रायोगिक उपग्रह “फेम्टो” का निर्माण किया हैं. यह पूरे भारत में से चुना गया एक मात्र डिज़ाइन है जिसे “एसआर 4” राकेट से अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा. रिफत शारूक़ ने इसका निर्माण अपने पांच दोस्तों के साथ मिलकर किया है.

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इस उपग्रह का वज़न केवल 64 ग्राम है, जो उन 80 मॉडलों में से एक है जिन्हे दुनिया के 57 देशो के युवा प्रतियोगियों द्वारा भेजे गए 86000 मॉडलों के बीच से चुना गया है.  कुछ समय पहले  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी  नासा ने आईडूडल के साथ मिलकर “क्यूब्स  इन स्पेस” नामक  प्रतियोगिता का आयोजन किया था. इसमें भारत से केवल एक ही मॉडल को चुना गया जिसे अन्य 79 मॉडलों  के साथ अंतरिक्ष में एसआर 4 राकेट से भेजा जायेगा.

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उपग्रह को थ्री-डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके प्रबलित कार्बन रेशो से बनाया गया है. इसे तैयार करने में शरूक और उनकी टीम को 2 साल का समय लगा और इसके निर्माण में एक लाख रुपयों की लागत आई. यह उपग्रह 12 मिनट उप-कक्षीय अंतरिक्ष उड़ान के बाद वापस धरती पर आजायेगा और समुद्र स्थल पर उतरेगा.


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