नई दिल्ली। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि एक वक्त था जब पाकिस्तान हर उस मुल्क के लिए एटम बम का ब्लैक मार्केट था, जो इसे हासिल करना चाहता था। लेकिन आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि पाकिस्तान ने दूसरे मुल्क के लिए भी एटम बम बना रखे हैं। जानकारों का कहना है कि ‘इस्लामिक बम’ के नाम पर सऊदी अरब ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद की, बदले में पाकिस्तान ने उसके लिए बम बनाया।

उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम फोड़ने का दावा किया तो दुनिया की नींद उड़ गई। हालांकि बहुत से जानकारों को उसके दावे में दम नहीं दिखता। उन्हें लगता है कि उत्तर कोरिया ने दरअसल ज्यादा बड़े और ताकतवर परमाणु बम का ही परीक्षण किया है। लेकिन, सच ये है कि अगर पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक ना सौंपी होती तो वो एटम बम भी ना बना पाता। मगर, उत्तर कोरिया ही नहीं बल्कि सउदी अरब भी पाकिस्तान का शुक्रगुजार है।

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ये मानने वालों की कमी नहीं कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के लिए भी एटम बम बनाया है। कहा जाता है कि संकट में एटम बम से सऊदी अरब की मदद करेगा पाकिस्तान? और, अमेरिकी सिनेटर रॉन जॉनसन का मानना है कि संकट की घड़ी आ पहुंची है। सऊदी अरब में शिया धर्मगुरु को सजा-ए-मौत के बाद ईरान से उसके रिश्ते बेहद तल्ख हो चले हैं। रॉन जॉनसन ने कहा है कि सऊदी का पाकिस्तान से अच्छा रिश्ता है, वो लोग उससे सीधे हथियार खरीदकर मध्य एशिया को अस्थिर कर सकते हैं।

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इस सोच की एक बड़ी वजह ये भी है कि परमाणु बम बनाने में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आर्थिक मदद दी थी, क्योंकि वो इस्लामिक बम चाहता था ताकि वक्त पड़ने पर किसी भी इस्लामिक देश को पाकिस्तान से परमाणु बम मिल सके। पाकिस्तान, सऊदी अरब को एटम बम दे सकता है ये सिर्फ अटकल ही नहीं है। साल 2014 में सीआईए के पूर्व विश्लेषक ब्रूस राइडेल ने कहा था कि एक बड़ी अनजान बात यह है कि क्या वे (सउदी अरब) लोग बम के लिए पाकिस्तान के साथ पहले ही समझौता कर चुके हैं।

दरअसल, इस सोच के पीछे 2009 की घटना है, जब सऊदी अरब के तत्कालीन शासक शाह अब्दुल्लाह ने मध्य पूर्व मामलों के अमरीकी दूत डेनिस रॉस को चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने हदें पार कीं, तो वे भी परमाणु हथियार तैनात कर देंगे। जानकारों का मानना है कि शाह अब्दुल्लाह उसी परमाणु बम की बात कर रहे थे जिसे पाकिस्तान ने उनके और दूसरे मुल्कों की सहायता से बनाया।

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जी हां, पाकिस्तान का परमाणु बम ऐसे ही तैयार नहीं हुआ था, दरअसल इस्लामिक बम के नाम पर बने इस बम को निर्माण के पीछे कई देश थे, सबके अपने-अपने फायदे थे। भारत के खिलाफ मजबूत पाकिस्तान खड़ा करने के लिए चीन ने उसे तकनीकी मदद ही नहीं दी थी, कहा जाता है कि पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण से पहले चीन ने अपनी जमीन में पाकिस्तान में बने एटम बम का परीक्षण भी किया था। साभार: ibnlive


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