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लंदन के पूर्व मेयर केन लिविंगस्टोन ने कहा है कि इस्राईराल की बुनियाद ही ग़लत थी। केन लिविंगस्टोन ने बिलफौर घोषणापत्र में ब्रिटेन के विदेशमंत्री की भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा कि उस समय ब्रिटेन की सरकार ने बिलफौर घोषणापत्र जारी करने के लिए यहूदियों से लाखों डॉलर वसूल किये ताकि फिलिस्तीन को उनके हवाले कर सके।

उन्होंने फिलिस्तीन में इस्राईल के अस्तित्व की भूमिका उपलब्ध कराने के संबंध में ब्रिटेन की ग़लती के संदर्भ में बल देकर कहा कि इस्राईल की बुनियाद एक इतिहासिक ग़लती थी क्योंकि फिलिस्तीनी भूमि का संबंध इतिहास के आरंभ से फिलिसतीनियों से रहा है और हमें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहूदियों को यूरोपीय देशों और अमेरिका में बसाना चाहिये था। केन लिविंगस्टोन वर्ष 2000 से 2008 तक लंदन के मेयर थे। इसी प्रकार वह मई वर्ष 1981 से अप्रैल 1986 तक लंदन परिषद के अध्यक्ष और उसके बाद ब्रिटेन के सांसद भी थे।

लंदन के पूर्व मेयर के अनुसार इस्राईली शांतिपूर्ण जीवन के लिए फिलिस्तीन नहीं गये हैं और आरंभ से ही वे फिलिस्तीनियों को बल पूर्वक उनकी मातृभूमि से बाहर निकालने के प्रयास में रहे हैं। ब्रिटेन के पूर्व मेयर का यह बयान जायोनी शासन द्वारा फिलिस्तीन के 68वें अतिग्रहण की वर्षगांठ पर सामने आया है।

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मई वर्ष 1948 में फिलिस्तीन में अवैध जायोनी शासन की बुनियान रखी गयी और इस समय कई दशकों का समय बीत जाने के बाद न केवल फिलिस्तीनी जनता बल्कि इस शासन के क्रियाकलापों के कारण पूरे क्षेत्र की जनता को विभिन्न समस्याओं का सामना है।

बहरहाल जायोनी शासन द्वारा फिलिस्तीन का अतिग्रहण किये हुए 68 वर्ष का समय बीत रहा है और पश्चिमी देशों विशेषकर अमेरिका का व्यापक समर्थन प्राप्त होने के बावजूद उसे अपने अवैध अस्तित्व की वैधता के संकट का सामना है और लंदन के पूर्व मेयर के बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।


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