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इजराइल द्वारा फिलिस्तीनियों की जमीन को हड़पने के नये-नये हथकंडे अपनाए जाते रहें हैं. जिसके कारण फिलिस्तीनियों को अपनी ही जमीन से बेघर होना पड़ रहा हैं. जिसके कारण आज फिलिस्तीनी पत्थरों के दौर का जीवन जीने को मजबूर हैं.आज इजराइल द्वारा फिलिस्तीन की 96 फीसद जमीन पर कब्ज़ा किया जा चूका हैं केवल 6 फीसद जमींन फिलिस्तीनियों के पास बची हैं.

शनिवार को फ़िलिस्तीन स्वतंत्रता संगठन पीएलओ राष्ट्रीय ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस्राईल अतिग्रहित पश्चिमी तट में ज़्यादा से ज़्यादा निजी भूमि ज़ब्त करके पूरे फ़िलिस्तीनी क्षेत्र को हड़पना चाहता है. पीएलओ ने इजराइल की केन्द्रीय वेस्ट बैंक में स्थित अवैध अमोना सीमांत बस्ती ख़ाली करने वालों को पास में निजी फ़िलिस्तीनी भूमि में बसाने की योजना को ख़तरनाक बताते हुए कहा कि इसके पीछे इजराइल का मकसद फ़िलिस्तीनियों की ज़्यादा से ज़्यादा भूमि को हड़पना है.

इस्राईली सुप्रीम कोर्ट ने अमोना बस्ती को अवैध क़रार देते हुए 2016 के अंत तक सभी 41 आवासीय इकाइयों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है. इस फ़िलिस्तीनी भूमि पर 140 के क़रीब अवैध आवासीय इकाइयों के निर्माण की योजना है जिनमें से 40 इकाइयां उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो अवैध अमोना बस्ती ख़ाली करेंगे। इन भूमियों के फ़िलिस्तीनी मालिक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश में रहते हैं.

हाल में इस्राइली मीडिया ने सूचना दी थी कि अमोना सीमांत बस्ती ख़ाली करने वालों को दूसरे स्थान पर बसाने की ज़िम्मेदारी संभालने वाली कमेटी ने, यह सुझाव दिया कि इस सीमांत बस्ती के निकट ही फ़िलिस्तीनियों की निजी भूमि को 3 साल की लीज़ पर ले लिया जाए और बाद में लीज़ की मुद्दत बढ़ा दी जाए.


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