संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जारी अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी भूमि के बारे में पांचवीं वार्षिक रिपोर्ट में पश्चिमी तट और ग़ज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों की मानवीय पीड़ाओं के लिए इस्राईल के अतिग्रहण को जिम्मेदार बताया गया है। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि, अतिग्रहित फ़िलिस्तीन की भूमि में मानवीय ज़रूरतों के पीछे इस्राईल की ओर से जारी अतिग्रहण और निरंतर झड़पें हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार, ग़ज़्ज़ा के फ़िलिस्तीनी सबसे ज़्यादा मुसीबत उठा रहे हैं। लगभग 90000 फ़िलिस्तीनी ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल के 50 दिवसीय युद्ध के नतीजे में अभी तक बेघर हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ बसाए गए ज़ायोनियों के हिंसक व्यवहार और अवैध कॉलोनियों के निर्माण की ओर संकेत करते हुए कहा, “बसाए जाने वालों की ओर से हिंसा और क़ानून को लागू करने में इस्राइली अधिकारियों की नाकामी के कारण फ़िलिस्तीनी समाज की जानी व माली सुरक्षा ख़तरे में पड़ गयी है।”

संयुक्त राष्ट्र संघ की इस रिपोर्ट ने बसाए गए ज़ायोनियों के हमलों का लक्ष्य फ़िलिस्तीनी किसानों को उनकी भूमि से निकालना बताया है। इन हमलों के बारे में इस रिपोर्ट में आया है, “बसाए जाने वालों ने अब तक फ़िलिस्तीनियों के 11254 पेड़ों को या तो काट डाला या उन्हें उठा ले गए हैं।” यह घटना 2006 से अपने चरम पर पहुंच गयी है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की इस रिपोर्ट में इस्राईल से फ़िलिस्तीनी जनता के ख़िलाफ़ यहूदियों के हिंसक व्यवहार से निपटने, ग़ज़्ज़ा की नाकाबंदी ख़त्म करने और फ़िलिस्तीनियों की प्रशासनिक गिरफ़्तारी से बचने की मांग की गयी है।


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