इजराइल अब अरबी भाषा का दुश्मन बन बैठा है. इजराइल ने फ़िलीस्तीन में अरबी भाषा को प्रतिबंधित करने की कोश्सिश तेज कर दी है.

इजराइल की संसद में अधिकृत फ़िलीस्तीन के क्षेत्रों में अरबी भाषा की आधिकारिक स्थिति को समाप्त किए जाने पर विचार किया जा रहा है.

गार्डियन समाचार पत्र की रिपोर्ट के हवाले से अल-आलम टीवी चैनल ने ख़बर दी है कि ज़ायोनी शासन की कैबिनेट के कुछ मंत्रियों ने वर्ष 1948 से अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के क्षेत्रों में बोली जाने वाली अरबी भाषा के इस्तेमाल को रोकने के लिए इस्राईली संसद में एक विधेयक का मसौदा पेश किया है.

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उल्लेखनीय है कि 1948 के अधिकृत क्षेत्रों में आधिकारिक तौर पर अरबी भाषा ही प्रचलित है उसके बावजूद  ज़ायोनी शासन के कुछ मंत्रियों ने अरबी भाषा पर एक बार फिर यह हमला किया है. ज़ायोनी कैबिनेट द्वारा इस क़दम का उद्देश्य अधिकृत क्षेत्रों में फ़िलिस्तीनियों के प्रभाव को कम करके उन क्षेत्रों में यहूदियों के नियंत्रण को मज़बूत बनाना है, हालांकि इन क्षेत्रों में अधिकांश संख्या में फ़िलीस्तीनी ही रहते हैं.

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ज्ञात रहे कि इससे पहले स्वशासित फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने विश्व समुदाय को चेतावनी दी थी कि अतिक्रमणकारी ज़ायोनी अधिकारी, अधिकृत फ़िलिस्तीन में अरबी भाषा और इस्लामी पहचान को ख़त्म करने की कोशिश कर रहे हैं.


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