तेहरान। ईरान ने बुधवार को 10 अमेरिकी नौसैनिकों को रिहा कर दिया। ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने एक बयान में बताया कि जांच से पता चला है कि अमेरिकी सैनिक जानबूझकर उसके क्षेत्र में नहीं घुसे थे। इस घटना को लेकर अमेरिका के माफी मांगने के बाद नौ पुरुष और एक महिला नौसैनिक के दल को उनके नावों के साथ फारस की खाड़ी के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में छोड़ दिया गया।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने रिहाई की पुष्टि करते हुए कहा है कि हिरासत के दौरान सैनिकों के साथ किसी तरह की जोर जबरदस्ती की सूचना नहीं है। मंगलवार को यह घटना उस वक्त हुई थी जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने कार्यकाल के आखिरी संबोधन की तैयारी कर रहे थे।

संबोधन में ईरान के साथ परमाणु करार का ओबामा ने उल्लेख किया। पर इस घटना को लेकर वे चुप ही रहे।सैनिकों के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने तत्काल अपने ईरानी समकक्ष जवाद जारिफ से बात की। शुरुआत में ईरान ने कहा था कि अमेरिकी नौसैनिक उसके जलक्षेत्र में दो किमी अंदर तक घुस गए थे।

उनकी नावों पर मशीनगन लगे थे और उनकी गतिविधियां संदिग्ध थी। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि कुवैत से बहरीन जा रही नावें तकनीकी खराबी के कारण बहकर ईरान के जलक्षेत्र में प्रवेश कर गईं थीं। जिस जगह यह घटना हुई उसके करीब ही फ्रांस का सबसे बड़ा युद्धपोत चार्ल्स द गॉल तैनात है।

करार के बाद दूसरी बार: ईरान और अमेरिका इस समय परमाणु करार को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं। तेहरान और दुनिया के छह शक्तिशाली देशों के बीच जुलाई में यह समझौता हुआ था। इसके बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ाने वाली यह दूसरी घटना है। इससे पहले दिसंबर में होरमुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी पोत के करीब ईरान ने मिसाइल से निशाना लगाया था।

जब ब्रिटिश बने बंधक: इससे पहले तीन मौकों पर ईरानी नौसेना ब्रिटेन के नाविकों और नौसैनिकों को पकड़ चुकी है। जून 2004 में इराक अभियान में शामिल आठ ब्रिटिश नौसैनिक पकड़े गए थे। तीन दिन बाद ये रिहा किए गए। मार्च 2007 में पकड़े गए 15 नाविक और नौसैनिक 13 दिन बाद रिहा किए गए। नवंबर 2009 में पकड़े गए पांच ब्रिटिश नाविकों को ईरान ने एक सप्ताह बाद छोड़ा था। साभार: जागरण डॉट कॉम


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