ईरान की स्ट्रैटेजिक विदेश संबंधों की परिषद के अध्यक्ष ने कहा है कि सीरिया की लड़ाई का लक्ष्य फ़िलिस्तीन मामले को भुला देना और प्रतिरोध के मोर्चे के देशों को समाप्त करना है। सोमवार को फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी आंदोलन के महासचिव रमज़ान अब्दुल्लाह ने तेहरान में स्ट्रैटेजिक विदेश संबंधों की परिषद के अध्यक्ष कमाल ख़र्राज़ी से भेंट की।

इस भेंट में कमाल ख़र्राज़ी ने कहा कि अमेरिका, जायोनी शासन और क्षेत्र के अरब देशों ने सीरिया में जो युद्ध आरंभ किया है उसका लक्ष्य सुधार नहीं था बल्कि फिलिस्तीन मामले को भुला देना और प्रतिरोध के मोर्चे के देशों को समाप्त करना था।

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उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीन समस्या क्षेत्र के कुछ अरब देशों के गले की हड्डी थी और उससे वे मुक्ति पाना चाहते थे इसलिए उनकी कार्यवाहियां अमेरिका और ज़ायोनी शासन के हित में हैं। स्ट्रैटेजिक विदेश संबंधों की परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन से इन देशों का हालिया मुक़ाबला और उसे आतंकवादी कहना भी जायोनी शासन की सहायता के लिए है।

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फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी आंदोलन के महासचिव रमज़ान अब्दुल्लाह ने भी इस भेंट में फ़िलिस्तीन के भीतर संघर्षकर्ताओं के समर्थन पर बल दिया और कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान एकमात्र फिलिस्तीनी जनता का समर्थक है।

उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी जनता का प्रतिरोध अपने मित्रों के समर्थन से अतिग्रहित भूमियों की स्वतंत्रता तक जारी रहेगा। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी के गठन का उद्देश्य फिलिस्तीनी आंदोलन का समर्थन था परंतु आज वह फिलिस्तीनी जनता और फिलिस्तीन में प्रतिरोध के समर्थकों के विरुद्ध निर्णय लेता है।

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साथ ही रमज़ान अब्दुल्लाह ने कहा कि खेद की बात है कि फिलिस्तीन समस्या अरब देशों की कार्यसूचि से निकल गयी है और आज वे न इस्राईल को बल्कि ईरान को अपना शत्रु समझ रहे हैं।


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