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भारत और जापान ने शुक्रवार को ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार पर हस्ताक्षर किए. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके समकक्ष शिंजो आबे के बीच वार्ता के बाद दोनों की मोजूदगी में इस ऐतिहासिक करार पर हस्ताक्षर किए गए.

इस मौके पर पीएम ने कहा कि भारत-जापान असैन्य परमाणु करार स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी के निर्माण के हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम है. उन्होंने कहा, हमारा रणनीतिक सहयोग हमारे खुद के समाज की सुरक्षा के लिए ही अच्छा नहीं है बल्कि यह क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संतुलन भी लाता है.

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इस करार से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक और सुरक्षा संबंधों में गति लाने और अमेरिका स्थित कंपनियों को भारत में परमाणु संयंत्र लगाने में सहायता मिलेगी.  इस करार से जापान भारत में परमाणु तकनीक का निर्यात कर सकेगा. इसके साथ ही भारत तोक्यो के साथ ऐसा करार करने वाला पहला ऐसा देश बन गया है जिसने एनपीटी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट किया, ‘एक असाधारण मुलाकात जो भारत एवं जापान के बीच गर्मजोशी भरे अनूठे संबंधों का प्रतीक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के महामहिम सम्राट अकिहितो का अभिवादन किया.


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