सऊदी अधिकारी अब हज से उम्मीद लगाए हैं क्यूंकि सऊदी की अर्थव्यवस्था अब ख़राब हो गयी है। इस संदर्भ में सऊदी अरब के पर्यटन विभाग की राष्ट्रीय समिति के सदस्य अब्दुल ग़नी अलअन्सारी ने हज व्यवस्था के पुनर्गठन की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा है कि एेसा कुछ करना चाहिए कि हज, सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में अधिक भूमिका निभाए।

सऊदी अरब के इस अधिकारी ने हज से होने वाली आमदनी बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि सऊदी अरब के धार्मिक पर्यटन विभाग से हर साल 85 अरब रियाल से अधिक आमदनी होती है।

याद रहे यह लगभग 15 हज़ार करोड़ रूपये के बराबर है यानी सऊदी अरब को हज और धार्मिक पर्यटन से प्रतिदिन 410 करोड़ रूपये और प्रति घंटे 17 करोड़ से अधिक आमदनी होती है।

सऊदी अरब के पर्यटन विभाग की राष्ट्रीय समिति के सदस्य अब्दुल ग़नी अलअन्सारी ने कहा कि हर साल बीस लाख से अधिक लोग हज लिए सऊदी अरब की यात्रा करते हैं और इससे कम से कम एक लाख लोगों को रोज़गार भी मिलता है।

याद रहे पूरे साल धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए सऊदी अरब जाने वालों की संख्या एक करोड़ सत्तर लाख है और सऊदी अरब अगले दस वर्षों में यह संख्या तीन करोड़ तक करने की योजना रखता है।
सऊदी अरब के टीवी चैनल अलअरबिया की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सऊदी अरब को वर्ष 2014 में हज से प्राप्त आमदनी लगभग 850 करोड़ डॅालर थी।

तेल के बाद सऊदी अरब सरकार के लिए आमदनी का सब से बड़ा स्रोत हज और उमरा के लिए सऊदी अरब की यात्रा करने वाले लोग हैं।

इन हालात में सऊदी अरब तेल की कीमत गिरने से होने वाले नुकसान के बाद तीर्थयात्रियों से होने वाली आमदनी बढ़ाने के प्रयास में है किंतु पिछले साल हज के दौरान मिना में जिस तरह से हज़ारों लोग भगदड़ में मारे गये उससे सऊदी अरब की सरकार की इन कोशिशों की राह में बड़ी बाधा समझा जा सकता है। (hindkhabar)


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