पाकिस्‍तानी आतंकी संगठन जमात उद दावा का प्रमुख और मुंबई हमले का मास्‍टर माइंड हाफिज सईद ने अपना एक नया वीडियो जारी किया है. सईद का वीडियो  भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह के जेएनयू मामले पर दिये गये बयान के बाद आया.

सईद इस वीडियो में राजनाथ सिंह के उस बयान का खंडन किया है जिसमें गृह मंत्री ने कहा था कि जेएनयू में जो भी भारत विरोधी नारेबाजी हुए हैं उसके पीछे पाकिस्‍तानी आतंकी संगठन जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद का हाथ है. उन्‍होंने कहा था, जेएनयू में जो कुछ हुआ उसमें हाफिज सईद का समर्थन प्राप्‍त था.

सईद ने वीडियो के जरीये कहा कि उसका जेएनयू मामले से कुछ भी लेना-देना नहीं है. उसने ऐसा कोई भी ट्वीट नहीं किया है. सईद ने उस ट्विटर अक‍ाउंट को भी फेक करार दिया जिसकी चर्चा राजनाथ सिंह ने की थी. उसने कहा, मैंने ऐसा कुछ भी नहीं बोला. पूरे भारत में मेरे खिलाफ मामला बना दिया गया.

वीडियो में सईद ने एक बार फिर कश्‍मीर की आजादी का चर्चा किया. उसने कहा, मैं हैरान हूं, कश्‍मीर की आजादी को भारत किस तरह से देखता है. कश्‍मीर की आजादी के मामले पर भारत सरकार अपने ही देश के लोगों के साथ धोखा कर रही है. कश्‍मीर की आजादी कश्‍मीर के लोगों की अपनी लड़ाई है. कश्‍मीर में 8 लाख भारतीय जवान कश्‍मीरियों पर रोजाना जुल्‍म ढा रहे हैं. क्‍या कश्‍मीर के लोग अपनी आजादी की बात नहीं कर सकते हैं.

सईद ने एक बार फिर मंबई हमले का जिक्र किया. उसने कहा, मंबई में हुए बम धमाके में मेरा नाम लिया गया यह बिल्‍कुल ही गलत है. मेरे उपर लगाया गया सारा इल्‍जाम गलत है. पाकिस्‍तानी कोर्ट ने मुझे निर्दोष करार दिया और इस पूरे मामले को मीडिया के द्वारा फैलाया गया प्रोपेगंडा करार दिया.

ज्ञात हो जेएनयू मामले पर कल राजनाथ सिंह ने कहा था कि जेएनयू विवाद को लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का समर्थन प्राप्त था और देश को यह बात समझनी चाहिए. उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से यह भी कहा कि वह ऐसे प्रदर्शनों को राजनीतिक नफे-नुकसान के चश्मे से न देखें.

राजनाथ ने कहा, ‘‘जेएनयू की घटना को हाफिज सईद का समर्थन मिला है. यह ऐसा सच है जिसे देश को समझना चाहिए. जो कुछ हुआ है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.’ गृह मंत्री ने यहां पत्रकारों को बताया, ‘‘ऐसा कुछ नहीं किया जाना चाहिए जिससे देश की संप्रभुता और अखंडता पर सवालिया निशान लगे. ऐसे मौकों पर पूरे देश को एक सुर में बोलना चाहिए. मैं सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील करुंगा कि वे ऐसे मामलों को राजनीतिक नफे-नुकसान के चश्मे से न देखें.’ (prabhatkhabar)


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