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यूनिवर्सिटी कैंपस में लगी महात्मा गाँधी की मूर्ति

जहाँ दुनियाभर में मोहनदास करमचंद गांधी की शख्सियत के आगे महात्मा लगाया जाता है वहीँ एक खबर यह आ रही है की वहां के प्रोफेसर गाँधी जी की मूर्ति हटाने की मांग कर रहे है.

अफ्रीकी देश घाना में कुछ प्रोफेसरों ने अपने यूनिवर्सिटी कैंपस से महात्मा गांधी की प्रतिमा को हटाने की मांग की है. यूनिवर्सिटी ऑफ घाना के इन प्रोफेसरों का कहना है गांधी अफ्रीकी लोगों को लेकर नस्लवादी रवैया रखते थे.

एक ऑनलाइन याचिका में अकोसुआ अदोमाको एपोफो के नेतृत्व में कई प्रोफेसरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से गांधी की मूर्ति हटाने को कहा है. जब पिछले साल भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने घाना का दौरा किया था तो ये मूर्ति वहां की सरकार को उपहार के तौर पर दी गई थी.

इन अध्यापकों का कहना है कि मूर्ति को यूनिवर्सिटी परिसर में लगाने से पहले उनसे विचार विमर्श नहीं किया गया. अपनी याचिका में प्रोफेसरों ने कहा है, “इतिहासकार कैसे पढ़ाएगा और बताएगा कि काले लोगों को लेकर गांधी का रवैया ठीक नहीं था और देखिए हम अपने परिसर में उनकी मूर्ति लगातार उन्हें महिमामंडित कर रहे हैं.”

घाना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों का कहना है कि गांधी ने अफ्रीकी लोगों को सामाजिक तौर पर भारतीयों से कमतर समझा. अपने लेखन में उन्होंने अफ्रीकी लोगों को ‘काफिर’ कहा है जो काले लोगों के लिए अपमानजनक होता है.

बॉम्बे में 1896 में उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में कहा था, “यूरोपीय लोग जिस तरह हमें नीचे गिराना चाहते हैं, उसके खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा. वह चाहते हैं कि हमें गंवार काफिरों से भी नीचे ले जाएं जिनका पेशा शिकार करना है और जो सिर्फ यही चाहते हैं कि पत्नी खरीदने के लिए कुछ जानवर जमा कर लें और जो अपनी जिंदगी निठल्ले और नंगे ही बिताते हैं.


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