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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले ही अमेरिका में उनकी आलोचना शुरू हो चूकी हैं. ये आलोचना कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद) में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता, लैंगिंक हिसा, मानव तस्करी और गुलामी के बढ़ते मामलों को लेकर की जा रही है.

अमेरिकी संसद की विदेशी संबंध समित ने जब मोदी की यात्रा से पहले ‘अमेरिका-भारत संबंध : प्रगति, संतुलन और उम्मीदों के प्रबंधन’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की तो समिति के रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष बॉब क्रोकर ने ‘क्रूरता से ईमानदार’ होने का फैसला किया.

क्रोकर ने भारत को दुनिया के सबसे ज्यादा गुलाम वाले देश होने पर निराशा जताई और कहा कि भारत इस स्थिति को दूर करने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘कैसे कोई 1.2 से 1.4 करोड़ गुलामों वाला देश हो सकता है?’’ उन्होंने आगे कहा कि ‘‘क्या उनके अभियोजन पक्ष की क्षमता शून्य है, क्या उनकी कानून प्रर्वत्तन एजेंसियां शून्य है। मेरा मतलब है कि यह कैसे संभव है? वो भी उस पैमाने पर, यह बहुत अविश्वसनीय है।’’उन्होंने कहा कि मोदी ने आर्थिक सुधार करने की बजाए महज बयानबाजी की है.

समिति के शीर्ष डेमोक्रेट बेन कार्डिन ने सवाल उठाते हुवे कहा कि भारत में मानव तस्करी जैसे मुद्दों के बावजूद किस प्रकार अमेरिका उसे अपना सहयोगी और साथी मान रहा है. दूसरे डेमोक्रेट टिम काइने ने भारत द्वारा अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग को वीजा जारी नहीं करने का मुद्दा उठाया और सिख अमेरिकी समुदाय की धार्मिक सिख ग्रंथों और स्थानों की अपवित्रता को लेकर चिंताओं को जाहिर की.


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