एक फ़लस्तीनी शिक्षिका ने 10 लाख डॉलर यानी लगभग 6 करोड़ 70 लाख रुपए का अंतरराष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार जीता है. इस पुरस्कार की घोषणा वीडियो संदेश के ज़रिए पोप फ़्रांसिस ने की.

हानान अल हरुब

जीईएमएस (GEMS) इंटरनेशनल एजुकेशन फ़र्म की धर्मार्थ कार्य करने वाली शाख़ा वार्के फ़ाउंडेशन के दिए जाने वाले इस पुरस्कार के कार्यक्रम का आयोजन ऑस्कर की तर्ज़ पर किया जाता है. इसका उद्देश्य पढ़ाने-लिखाने के काम की प्रतिष्ठा को बढ़ाना है.

हानान अल-हरुब बेथलेहम के नज़दीक एक फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविर में पली-बढ़ीं और अब वो शरणार्थियों को पढ़ाती भी हैं. हिंसा से प्रभावित बच्चों को उबारने में उनकी ख़ास भूमिका रही है. वो नाटकों के ज़रिए बच्चों के मन से हिंसा और चिंता को दूर करने की कोशिश करती हैं.

हानान ने कहा कि शिक्षक दुनिया को बदल सकते हैं. पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने कहा कि वो फ़लस्तीनी शिक्षक होने पर गर्व महसूस करती हैं.

उन्होंने कहा कि वो पुरस्कार राशि से अपने छात्रों की मदद करेंगी. हानान को दुबई में एक समारोह में विजेता घोषित किया गया. वीडियो के ज़रिए प्रिंस विलियम ने उन्हें बधाई संदेश दिया. वहीं पोप फ्रांसिस ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षक शांति और एकता के प्रतीक हैं.

प्रिंस विलियम ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षकों पर ‘बहुत भारी ज़िम्मेदारी’ है. उन्होंने कहा, “शिक्षक बच्चों को प्रभावित, प्रोत्साहित और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए काम कर सकते हैं.”

भारत, कीनिया, फ़िनलैंड और अमरीका के शिक्षक इस प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पहुंचे थे. (बीबीसी)


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