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यूरोपीय संघ ने म्यांमार सेना प्रमुखों के साथ अपने रिश्तों में कटोती की है. रोहिंग्या अल्संख्यकों के खिलाफ़ हुए असमान बल उपयोग के विरोध में यूरोपीय संघ ने ये फैसला लिया है.

यूरोपीय संघ ने म्यांमार को चेतावनी भी दी है कि अगर संकट में कोई सुधार नहीं हुआ तो प्रतिबंधों पर भी विचार किया जा सकता है.  यूरोपीय संघ के राजदूतों द्वारा अनुमोदित इस समझौते पर सोमवार को विदेश मंत्रियों की बैठक में हस्ताक्षर किए गए.

इस समझौते में कहा गया कि सुरक्षा बलों द्वारा निष्पादित बल के असमान उपयोग के चलते यूरोपीय संघ और इसके सदस्य राज्य म्यांमार/बर्मा सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के निमंत्रण को निलंबित कर देंगे और सभी व्यावहारिक रक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे.

इसका अलावा यूरोपीय संघ ने वर्तमान में उन हथियारों और उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है जो “आंतरिक दमन” के लिए इस्तेमाल किया जा सकते है, साथ ही कहा कि अगर संकट में सुधार नहीं होता है तो “अतिरिक्त उपायों पर भी विचार कर सकता है”

ध्यान रहे म्यांमार से रोहिंग्या मुस्लिमों के पलायन में कमी आई थी. लेकिन सोमवार को करीब 11,000 रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश का रुख किया है.


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