यरूशलेम को इज़राइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के बाद दुनिया भर की आलोचना झेल रहे अमेरिका को ने केवल सयुंक्त राष्ट्र ने आलोचना लगाई है बल्कि यूरोपीय साथी देशों ने भी फटकार लगाई है.

डोनाल्ड ट्रम्प के संबोधन के कुछ मिनट बाद ही संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो जीटरस ने अमेरिका के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के रूप में शुरू दिन से लगातार मेने किसी एकतरफा उपाय के खिलाफ बात की है जो इजरायल और फिलिस्तीनियों के लिए शांति की संभावना को खतरे में डाल देगी.

उन्होंने कहा कि दो राज्यों के समाधान के अलावा शांति का कोई अन्य तरीका नहीं हो सकता. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, इस समय ये सबसे बड़ी चिंता की बात है, मैं इसे स्पष्ट करना चाहता हूं – दो राज्यों के समाधान के अलावा कोई विकल्प नहीं है और कोई प्लान बी भी नहीं है.

इसी बीच इस मसले पर सुरक्षा परिषद के 15 में से कम से कम आठ सदस्यों ने सयुंक्त राष्ट्र से एक विशेष बैठक की बुलाने मांग की है. बैठक की मांग करने वाले देशों में दो स्थायी सदस्य ब्रिटेन और फ्रांस तथा बोलीविया, मिस्र, इटली, सेनेगल, स्वीडन, ब्रिटेन और उरुग्वे जैसे अस्थायी सदस्य शामिल हैं.

ध्यान रहे स्थायी सदस्य ब्रिटेन और फ्रांस अमेरिका के इस कदम की तीखी आलोचना कर चुके है. ब्रिटिश प्रधान मंत्री थेरेसा मई ने बुधवार को कहा कि ब्रिटिश सरकार ट्रम्प के फैसले से सहमत नहीं है, यह शांति प्रयासों को “बेकार” कर रहा है. उन्होंने एक बयान में कहा, “हम जेरूसलम में अमेरिकी दूतावास को स्थानांतरित करने के लिए यू.एस. के फैसले से सहमत नहीं हैं और जिसमे वे इजरायल की राजधानी के रूप में यरूशलेम को मानते हैं. हम मानते हैं कि इस क्षेत्र में शांति की संभावनाओं के मामले में यह बेकार है.”

वहीँ फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमॅन्यूएल मैक्रॉन ने कहा कि वह ट्रम्प के “एकतरफा” निर्णय का समर्थन नहीं करते और पूरे क्षेत्र को शांति की और बुलाते हैं. मैक्रोन ने अल्जीयर्स में एक संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा, “यह फैसला एक अफसोसजनक निर्णय है कि फ्रांस अंतरराष्ट्रीय कानून और यू.एन. सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के खिलाफ इस कदम को स्वीकार नहीं करता है.


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