नई दिल्ली | मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था से कालेधन को ख़त्म करने के लिए नोट बंदी का जो फैसला लिया था वो देश की अर्थव्यवस्था पर बेहद भारी पड़ा है. अभी हाल ही में आये जीडीपी के आंकड़ो ने इस बात की पुष्टि भी की है. जनवरी से मार्च के बीच चौथे क्वार्टर में देश की जीडीपी 7.8 से घटकर 5.7 फीसदी रह गयी. हालाँकि सरकार अभी भी इस बात को मानने के लिए तैयार नही है की यह सब नोट बंदी की वजह से हुआ है.

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लेकिन चीन ने भारत की जीडीपी में आई गिरावट के लिए नोट बंदी को ही जिम्मेदार माना है. चीन के सरकार अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा की भारत की विकास दर में आई गिरावट की वजह नोट बंदी जैसे सुधार उपाय है. यह अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है. वैसे भारत का जीडीपी रेस में पिछड़ना चीन के लिए काफी फायदेमंद रहा क्योकि अब चीन वापिस दुनिया की सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्था बन गयी है.

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गोल्बल टाइम्स के संवादाता शियाओं शिन ने भारत को हाथी बताते हुए लिखा की ड्रैगन और हाथी के बीच हुई रेस में भारत पिछड़ गया. भारत की अर्थव्यस्था में आई गिरावट अप्रत्याशित है जिससे चीन को फायदा हुआ है. इसकी वजह नोट बंदी है और यह तथ्य साबित करते है. इससे अर्थव्यवस्था पर बेहद ही ख़राब असर पड़ा है. इन तथ्यों के देखकर लगता है की भारत को नोट बंदी जैसे कदम उठाने से पहले गंभीरता से सोचना चाहिए.

हालाँकि शिन ने माना की भारत में खुशहाली के लिए सामाजिक और आर्थिक सुधार जरुरी है लेकिन देश की जनता को इस तरह के शॉक नही दिए जा सकते क्योकि अभी भी ज्यादातर भारतीय अपनी रोजमर्रा की चीजो के लिए कैश पर निर्भर है. इसलिए सरकार को ऐसे शॉक ट्रीटमेंट से बचना चाहिए. हालाँकि वित्त मंत्री अरुण जेटली जीडीपी में आई गिरावट के लिए नोट बंदी को जिम्मेदार नही मानते . उनका कहना है की इसके लिए दुनिया भर में आई वैश्विक मंदी जिम्मेदार है.

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