यूरोपीय संघ की रिपोर्ट के अनुसार चीन न केवल हांग कांग की बंदरगाह के मामलों में हस्तक्षेप जारी रखे हुए है बल्कि आज़ादी को सीमित करने, डेमोक्रेसी की अनदेखी करने और क्षेत्र में कई प्रकाशकों के लापता होने का कारण बना है। पहली जुलाई वर्ष 1997 से हांग कांग के चीन में विलय के समय से यूरोपीय संघ के कुछ महत्वपूर्ण देशों ने चीन और हांग कांग में उसके क्रिया- कलापों के संबंध में इस प्रकार का दृष्टिकोण अपनाया है। अलबत्ता इस बीच हर देश से अधिक ब्रिटेन हांग कांग में आज़ादी और डेमोक्रेसी की बात करता है। क्योंकि वर्ष 1997 में हांगकांग के चीन में विलय से सबसे अधिक आघात ब्रिटेन के हितों को लगा है।

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ब्रिटेन ने चीन पर दबाव में वृद्धि करने के लिए अमेरिका को भी अपने साथ कर लिया है। इस मामले में ब्रिटेन और अमेरिका का एक साथ हो जाना चीन के क्रोध का कारण बना है और हालिया वर्षों में कभी- कभी चीन यह धमकी देता है कि वह लंदन और वाशिंग्टन के साथ अपने संबंधों के स्तर को कम कर लेगा। यद्यपि चीन और यूरोपीय संघ एक दूसरे के बड़े व्यापारीरिक भागीदार हैं परंतु यूरोपीय संघ चीन के विरुद्ध इस प्रकार का दृष्टिकोण अपना कर उस चीज़ में अमेरिका के साथ चलने का प्रयास कर रहा है जिसे मानवाधिकार कहा जाता है।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि चीन हांग कांग के छोटे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता है किन्तु चीन विश्व समुदाय को यह विषय समझाने के प्रयास में है कि 1009 वर्ग किलोमीटर की हांगकांग की लंबी बंदरगाह चीन की संप्रभुता में आ गयी है और दूसरे देशों को चाहिये कि वे चीनी नीतियों के अनुसार अपने संबंधों व हितों की रक्षा करें और हर प्रकार के दायित्वहीन बयान से बचें जिससे बीजींग के साथ उनके संबंधों को आघात पहुंचे।


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