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संयुक्त राष्ट्रसंघ में ईरान ने दुनिया भर में खासकर मिडिल ईस्ट में बच्चों पर हो रहे अपराधों को लेकर सयुंक्त राष्ट्र संघ की चुप्पी पर चिंता जताते हुए कहा कि सयुंक्त राष्ट्र संघ ने यमन में सऊदी अरब के हमलों में मरने वालें बच्चों के संबंध में दबाव के कारण चुप्पी साध रखी हैं.

संयुक्त राष्ट्रसंघ में ईरान के राजदूत ने कहा कि चिंता की बात है कि बच्चों की हत्या, स्कूलों और अस्पतालों को बर्बाद करने के मुकाबले में विश्व समुदाय राजनीतिक दबावों का साक्षी है. उन्होंने पिछले वर्ष ग़ज़्ज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनी बच्चों पर इजराइल के जुल्मों की और ध्यान दिलाते हुए कहा कि फ़िलिस्तीनी बच्चों के विरुद्ध खुले अपराधों के बावजूद इस्राईल का नाम राष्ट्रसंघ की ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया गया. उन्होंने वर्ष 2014 में इस्राईली सेना द्वारा ग़ज़्ज़ा पट्टी पर हमले के दौरान मारे जाने वाले 540 और घायल होने वाले 2955 फिलिस्तीनी बच्चों की ओर इशारा करते हुए’ कहा कि ग़ज़्ज़ा पट्टी में अपने अपराधों के कारण इजराइल पर मुकद्दमा नहीं चलाया गया.

उन्होंने आगे कहा कि फिलिस्तीन की तरह यमन मामलें में भी ऐसा ही हुआ. सयुंक्त राष्ट्र संघ के विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त तथ्यों के आधार पर यमन में मारे गये 875 बच्चों सहित आम नागरिकों की हत्या के लिए सऊदी गठबंधन को ज़िम्मेदार बताया गया है.


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