mir

बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के मामले में जमात-ए-इस्लामी के वरिष्ठ नेता मीर कासिम अली को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा है.

प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने अदालत कक्ष में एक शब्द में ही फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘खारिज’. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में कासिम को फांसी की सजा दी थी.

मीडिया व्यवसायी कासिम को जमात को आर्थिक मदद पहुंचाने के अलावा हत्या, नजरबंदी, प्रताड़ना और धार्मिक भावना को भड़काने के मामले में दोषी ठहराया गया था.  प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार मुस्लिम बहुल देश में इस पद पर आसीन पहले हिंदू हैं.

फैसले के बाद अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में अटॉर्नी जनरल महबूब ए आलम ने संवाददाताओं को बताया कि अली राष्ट्रपति से क्षमा याचना कर सकता है. अब यही एक अंतिम विकल्प है, जो उसे मौत की सजा से बचा सकता है.


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें