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बांग्लादेश के पहले हिन्दू मुख्य न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार सिन्हा ने रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के बाद इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति अब्दुल हामिद को भेजा है.

भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप के चलते वह पिछले एक महीने से छुट्टी पर विदेश चले गए थे. छुट्टी खत्म होते ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से ही अपना इस्तीफा राष्ट्रपति अब्दुल हामिद को भेज दिया. राष्ट्रपति के प्रेस सचिव जैनुल आबेदिन ने शनिवार को जस्टिस सिन्हा के इस्तीफे की पुष्टि की.

ध्यान रहे 5 सीनियर जजों ने चीफ जस्टिस सिन्हा पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों के आधार पर उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया था. इसी के साथ बांग्लादेश सरकार ने 3 अक्टूबर को सिन्हा के छुट्टी पर जाते ही उनकी जगह अब्दुल वहाब को एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्त कर दिया था.

सरकार द्वारा संविधान में किए गए इस 16वें संशोधन को रद्द करने के बाद जस्टिस सिन्हा बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार के निशाने पर आ गए थे. इस मसले पर सरकार के रुख की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट न्यायपालिका का संरक्षक है, उसकी छवि की रक्षा करना उनका दायित्व है.

बांग्लादेश सरकार ने 2014 में इस संशोधन को मंजूरी दी थी, जिसके तहत जजों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता था. इसके अनुसार जजों के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ महाभियोग भी लाया जा सकता था.


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