नई दिल्ली। बांग्लादेश अब इस्लामिक मुल्क नहीं रह जाएगा। वहां की सुप्रीम कोर्ट में इसपर बहस शुरू हो गई है कि क्यों ना धर्म को राज्य से अलग कर दिया जाए। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमलों के मद्देनज़र ऐसा सोचा जा रहा है।

अब इस्लामिक देश नहीं रहेगा बांग्लादेश

बांग्लादेश में अचानक हिंदू, ईसाई, शिया जैसे अल्पसंख्यकों पर धार्मिक हमले बढ़े हैं। बार-बार इस्लामिक अतिवादियों पर आरोप लग रहा है कि वे देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं।
पाकिस्तान से टूटकर 1971 में जब बांग्लादेश वजूद में आया, तब उसे एक सेकुलर देश घोषित किया गया था। लेकिन 1988 में संविधान में संशोधन करके इस्लाम को राज्य का आधिकारिक मज़हब बना दिया गया।
फिलहाल बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट में इस संशोधन को अवैध बताते हुए चुनौती दी गई है। चुनौती देने वाले बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय के नेता हैं।
इस बीच अमेरिका ने भी बांग्लादेश को अलर्ट जारी कर कहा है कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाके वहां भर्ती की फिराक में हैं। जवाब में बांग्लादेश की सरकार ने कहा है कि हमला करने वाले स्थानीय अतिवादी समूह के लोग हैं। यहां इस्लामिक स्टेट की चुनौती फिलहाल नहीं है।
बांग्लादेश की पुलिस ने कहा है कि अभी तक हुए सभी हमलों में कार्रवाई हुई है। गिरफ्तार मुलज़िमों ने कोर्ट में बताया है कि उनका संबंध जमात उल मुजाहिद्दीन से है। वे किसी भी तरह इस्लामिक स्टेट से नहीं जुड़े हैं।
2013 से लेकर अभी तक बांग्लादेश में 13 हत्याएं हो चुकी हैं। इनमें लेखक से लेकर ब्लॉगर तक शामिल हैं। बार-बार आशंका ज़ाहिर की गई थी कि कहीं इन्हें इस्लामिक स्टेट का समर्थन तो नहीं मिल रहा?
बांग्लादेश बार-बार इसे खारिज करता रहा है और हमलावरों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई का दावा भी किया है।
बांग्लादेश में फिलहाल मुसलमानों की आबादी 90 और हिंदू 8 फीसदी हैं। 2 फीसद में ईसाई और बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। (liveindiahindi)

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