लगभग दो हफ्ते से जारी रोहिंग्या मुस्लिमों पर हिंसा को लेकर हो रही आलोचना के बाद अब जाकर नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है.

म्यांमार के राज्य सलाहकार और देश के वास्तविक नेता के रूप में तुर्की के राष्ट्रपति तय्यिप एर्दोगान के साथ फोन पर बातचीत के दौरान सु ने कहा कि उनकी सरकार  रोहिंग्या के अधिकारों की रक्षा करने के लिए काम कर रही है.

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सुकी ने कहा, “हम बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, सबसे ज्यादा से ज्यादा, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक संरक्षण से वंचित होने का क्या मतलब है.” “इसलिए हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे देश के सभी लोग अपने अधिकारों के संरक्षण के हकदार हैं, साथ ही साथ राजनैतिक, सामाजिक और मानवीय रक्षा के अधिकार भी.

हाल ही के दिनों में सू की को लेकर आशंका जताई गई थी कि वह अपनी सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर हत्याओं और विस्थापन के खिलाफ बोलने में नाकाम रही है, विशेष रूप से मानवाधिकारों के चैंपियन के रूप में उनकी पिछली छवि को देखते हुए.

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फोन कॉल के दौरान, सुकी ने यह भी कहा कि आतंकवादियों के हितों को बढ़ावा देने के लिए “गलत सूचना” का वितरण किया जा रहा है, उनका कहना है कि सरकार सुनिश्चित कर रही है कि आतंकवाद राखीन राज्य में फैल न सके.


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