जैश-ए-मोहम्मद पर कार्रवाई का जो फैसला पाकिस्तान की सरकार ने लिया है, ये देश के लिए बेहद खतरनाक है। सरकार द्वारा यहां के मस्जिदों, मदरसों और जिहाद के खिलाफ कार्रवाई पाकिस्तान की एकता और अखंडता के लिए खतरा है।
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ये बातें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर ने अपने लेख में लिखी हैं। जैश के ही ऑनलाइन मुखपत्र ‘अल कलाम’ में मसूद का ये लेख तब सामने आया जब उसे हिरासत में लिया जा रहा था।

मसूद ने ‘सैदी’ के नाम से खुद ये लेख लिखा। इसमें उसने तिहाड़ और कोट भलवाल में नजरबंदी के दौरान की घटना जिक्र किया है। मसूद को आईसी-814 विमान के अपहरण के बाद जम्मू की जेल से रिहा किया गया था।

इसके बाद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर हमले के आरोप में भी उसे पहले बहावलपुर जेल और फिर उसके घर पर नजरबंद रखा गया था।

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अजहर मसूद ने अपने लेख में कहा है कि उसे न तो गिरफ्तारी की परवाह है और नहीं हत्या की। अजहर ने लिखा कि मेरी हत्या से न तो मेरे दोस्त मुझे याद करेंगे और न ही मेरे दुश्मन…हां…एक सेना जरूर तैयार हो गई है जिसे मौत से प्यार है।

मसूद ने आगे लिखा कि अल्लाह की इच्छा से ये सेना हमारे दुश्मनों को ज्यादा दिनों तक खुशियां नहीं मनाने देगी। मेरी अनुपस्थिति में भी ये सेना कार्रवाई करती रहेगी। अल्लाह को धन्यवाद, मुझे ऐसा नहीं लगता कि मेरी मौत तक में ऐसी कोई इच्छा मेरी बची है जो पूरी नहीं हुई है। अपनों की बात करें तो मेरे परिवार और मेरे बच्चों की रक्षा अब तक अल्लाह करता आया है और आगे भी वही करेगा।

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पाकिस्तान की सरकार पर निशाना साधते हुए मसूद ने लिखा कि भारत की ओर से लगातार ऐसा शोर सुनाई दे रहा है कि मुझे पकड़ा जाए और मारा जाए… दूसरी ओर हमारी सरकार को ज्यादा पीड़ा इसलिए हो रही क्योंकि उन्हें शायद लग रहा कि हम उनकी दोस्ती में दरार पैदा कर रहे हैं। यहां की सरकार मोदी और वाजपेयी के साथ खड़े रहना चाहती है।

मसूद अजहर ने आगे लिखा कि मैंने कभी पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मेरे खिलाफ पूरे पाकिस्तान के किसी भी थाने में एक भी केस दर्ज नहीं है।

इसके बाद भी बहावलपुर केन्द्रीय जेल में मेरे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है जिसमें कहा गया कि जेल प्रशासन को इस बात की शंका है कि मैं या मेरे साथी उन पर कोई हमला कर सकते हैं। इसलिए मुझे डेरा गाजी खान शिफ्ट किया गया।

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उसने पुरानी बातें याद करते हुए आगे कहा कि ये मेरा देश है। इस लेख में उसने अपने जम्मू जेल में बिताए वक्त को भी याद किया।

उदाहरण देते हुए उसने बताया कि जब उसे जेल से हटाने की योजना की जा रही थी उसी समय कश्मीरी मुजाहिदीन ने उसे काफी सहयोग दिया था। वे एक दीवार की तरह खड़े हो गए जिसकी वजह से प्रशासन उसे दूसरे जेल नहीं ले जा सके। इसके लिए उन लोगों को मेरा धन्यवाद। ये मामला 1994 के दौरान का है।

साभार अमर उजाला


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