इराक के मुस्लिम उलेमाओं के संगठनों ने मस्जिदुल अक्सा पर आए संकट पर प्रमुख अरब देशों की चुप्पी की आलोचना की है.

शेख फोग काज़िम अल-मक़दादी ने कहा कि निस्संदेह मुस्लिमों के दिलों में पहली क़िबाला यानि अल-अकसा मस्जिद की एक विशेष पवित्रता है. उन्होंने कहा, इस कारण से, यह मुसलमानों के लिए एक धार्मिक प्रतीक भी माना जाता है और मुसलमानों द्वारा शरिया के तहत इसकी अपवित्रता के सबंध में सख्त रुख अपनाना चाहिए.

इस दौरान उन्होंने मस्जिद पर हुए इजरायली हमले की कुछ अरब शासकों और मुसलमानों की चुप्पी पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि जायोनी रिश्तों के कारण ये पश्चिमी लोगों की कठपुतलिया बने हुए हैं.

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “इस चुप्पी” से पता चलता है कि ये शासक भी इजरायल के यहूदी शासन के साथ मिले हुए हैं.


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