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हार्वेज हिब्रू अखबार ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि अरब देशों ने पेरिस में होने वाली यूनेस्को की बैठक में पारित होने वाले इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव को रद्द कर दिया है.

अखबार ने बताया कि इस मसौदा में इजरायल की वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी को लेकर अपनाई गई नीतियों की आलोचना की गई है. अखबार ने कहा कि अप्रैल 2013 के बाद से यह पहली बार है कि यूनेस्को सम्मेलन या इसके संस्थानों में इजरायल-अरब संघर्ष पर कोई मसौदा प्रस्तावित नहीं किया गया है.

अखबार ने इजरायल के विदेश मंत्रालय में एक उच्च रैंकिंग अधिकारी का हवाला देते हुए कहा: अरब राज्यों ने यूनेस्को कार्यकारी समिति के अध्यक्ष माइकल फोर्ब्स और [यूनेस्को में इज़राइल के दूत] कर्मेल शमा-हकोन और जॉर्डन के राजदूत मकरम कयासी के बीच विचारशील राजनयिक संपर्क के बाद मसौदा प्रस्ताव को रद्द करने का निर्णय लिया है.

आधिकारिक ने बताया कि अमेरिका ने इसमें भूमिका निभाई है. शांति प्रक्रिया के लिए अपने दूत जेसन ग्रीनब्लैट के जरिए इसमें हस्तक्षेप कराया गया. ध्यान रहे पिछले चार सालों में विशेष रूप से पिछले दो सालों में यूनेस्कों में होने वाला मतदान फिलिस्तीनियों के पक्ष में हैं. जो कि फिलिस्तीनियों के कब्जे वाले इलाकों में इजरायल की नीति की आलोचना करता हैं.

अप्रैल 2015 से संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन के पक्ष में जेरूसलम और अल-अक्सा मस्जिद से संबंधित मुद्दों पर पांच प्रस्तावों की पुष्टि की है. इसके अलावा हेब्रोन में अल-हरम अल इब्राहिमी मस्जिद को भी फिलिस्तीनी विरासत स्थल करार दिया है.


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