अरब संघ ने अरब देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अरब देशों की नीतियों से इस्लामिक जगत को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं. जिसके कारण पुरा अरब जगत सकंटमय स्थिति की चपेट में आ गया हैं.

अरब संघ के महासचिव ने कहा कि जिस स्थिति का अरब संघ को सामना है वह इन देशों की स्थिति को प्रतिबिंबित करने वाला है परंतु उसका यह अर्थ नहीं है कि अरब संघ निराश हो चुका है क्योंकि अरब देशों के पास स्थिति को बेहतर करने की क्षमता मौजूद है.

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उन्होंने कहा कि कई वर्षों का समय बीत रहा है जब अरब संघ को राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के मैदान में दयनीय स्थिति का सामना है. वर्ष 2011 से पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में जनांदोलन आरंभ हुआ और उसके बाद सीरिया संकट आरंभ हुआ और क्षेत्र में आतंकवादियों की गतिविधियां आरंभ हो गयीं.

उन्होंने आगे कहा, उस समय से लेकर अब तक अरब देशों को राजनीतिक और सुरक्षा संकटों का सामना है और अब आर्थिक संकट भी इन संकटों से जुड़ गया है और सऊदी अरब सहित कुछ अरब देशों के क्रिया कलापों से इस्लामी जगत को विभिन्न समस्याओं का सामना हो गया है और अब इस समय उसने अरब जगत को भी अपनी चपेट में ले लिया है.

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महासचिव ने कहा, चूंकि मिस्र और लीबिया में जनांदोलन अपने लक्ष्यों तक नहीं पहुंच सका और विदेशी हस्तक्षेपों, तानाशाही सरकारों तथा सीरिया संकट के जारी रहने के कारण राजनीतिक  अस्थिरता, युद्ध व हिंसा अरब जगत में अपने शिखर बिन्दु पर पहुंच गयी है और इस प्रकार की स्थिति में अरब जगत को अपने क्रिया कलापों के कारण आपत्तियों का सामना है.

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