15 साल बाद भारत वापस लौटी गीता ने जहां एक ओर इंदौर में खुशी के साथ तिरंगा फहराया. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के अंसार बर्नी ट्रस्ट ने सिंध हाईकोर्ट में गीता को भारत भेजने के खिलाफ याचिका दायर कर दी है.

गीता के पाकिस्तान में रहने के दौरान उसके रिश्तेदारों को खोजने और भारत वापस भेजने के लिए प्रयासरत रहे अंसार बर्नी ट्रस्ट ने सोमवार को सिंध हाईकोर्ट में संवैधानिक याचिका संख्या HC/508/2016 के तहत गीता को भारत भेजने के खिलाफ याचिका दायर की.

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इस ट्रस्ट के चेयरमैन और मानव अधिकार के पाकिस्तान के पूर्व संघीय मंत्री अंसार बर्नी के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट और फेसबुक के जरिए इस बात की जानकारी दी गई.

उन्होंने ट्वीट में लिखा कि, आखिर किस आधार पर और किस कानून के तहत गीता को भारत को सौंपा गया, जबकि भारत के जरिए उसकी नागरिकता को लेकर किसी भी तरह का कोई ठोस सबूत पाकिस्तान सरकार को सौंपा नहीं गया था.

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फेसबुक पेज पर भी एक पोस्ट के जरिए इस बात को लेकर आपत्ति जताते हुए मुकदमा दायर किए जाने की जानकारी दी गई. पोस्ट में ये भी लिखा गया कि गीता को भारत तो ले जाया गया लेकिन वहां उसे एक ऐसी जगह रुकाया गया है जहां कोई भी उससे मिल नहीं सकता और न ही मीडिया या किसी एनजीओ को ही गीता से मिलने की आजादी है.

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गौरतलब है कि बिहार के एक परिवार ने गीता को अपनी बेटी बताया था. हालांकि, डीएनए परीक्षण के बाद गीता के उनकी बेटी होने की पुष्टि नहीं हुई. इसके बाद से भी कई परिवारों ने गीता को अपनी बेटी बताया लेकिन किसी के भी गीता के रिश्तेदार होने की पुष्टि नहीं हो सकी. (NEWS 18)


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