दुनिया भर में आतंक के पीछे मुस्लिमों को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, बावजूद इसके आतंक से सबसे ज्यादा पीड़ित मुस्लिम समुदाय है. अमरीका के राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केन्द्र के अनुसार, 82 से 92 प्रतिशत आतंकवादी हमलों की बलि मुसलमान चढ़ें हैं.

ब्रिटिश समाचार पत्र ने शुक्रवार की अपनी रिपोर्ट में लिखा कि आतंकवादी गुट दाइश और अन्य आतंकवादी गुट कितनी संख्या में और मुसलमानों का जनसंहार करेंगे ताकि दुनिया को यह पता चल सके कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई वास्ता नहीं है.

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समाचार पत्र ने काबुल, बग़दाद और हालिया दिनों में मैन्चेस्टर सिटी में होने वाले धमाकों की ओर संकेत किया और सवाल किया कि लोग अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में दाइश के हाथों मारे जाने वालों के लिए एक मिनट का मौन क्यों नहीं रखते?

समााचार पत्र इन्डीपेंडेंट का कहना था कि अधिकतर मुसलमान न केवल दाइश की निंदा करते है बल्कि इस आतंकवादी गुट के भयावह अपराधों को सहन भी करते हैं किन्तु खेद की बात यह है कि मुसलमानों पर आतंकवाद के समर्थन के आरोप भी लगते रहते हैं.

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ब्रिटेन का यह समाचार पत्र इसी प्रकार दूसरे देशों में पश्चिम के सैन्य हस्तक्षेप के परिणाम में आतंकवादी गुटों के अस्तित्व में आने के बारे में लेबर पार्टी के प्रमुख जेर्मी कोरबन के बयान की ओर संकेत करते हुए लिखता है कि ब्रिटेनवासियों को हालिया आतंकी हमलों के दृष्टिगत साहसिक रूप से यह स्वीकार करना चाहिए कि आतंकवाद से संघर्ष का अब तक कोई लाभ नहीं हुआ है और 8 जून के चुनाव में इस विषय के बारे में उनको सोचना चाहिए.

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