चोपलोन अता (किर्गिज़िस्तान), 8 सितम्बर।
किर्गिज़िस्तान की सुन्दर झील इसिक कुल के किनारे आयोजित विश्व बंजारा खेलों में भारत को कोई पदक तो नहीं मिला लेकिन भारतीय टीम को उम्मीद है कि वह यहाँ से काफ़ी सीखकर जा रही है जिसका लाभ दो साल होने वाले अगले बंजारा खेलों में मिलेगा। भारत पहली बार इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहा है।
उम्मीदें बरक़रार-उमर
भारतीय टीम के प्रमुख उमर मुख़्तार तंबोली ने बताया कि भारत ने कुछ तीन खेलों में हिस्सा लिया और उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। मूल रूप से कुश्ती और इसके विभिन्न स्वरूपों के इन तीन खेलों में भारत को कोई पदक नहीं मिला लेकिन हम अगले टूर्नामेंट में पदक की उम्मीद कर रहे हैं। तंबोली ने कहाकि भारत ने एलिश, कजाक़ कुरैश और मास रेसलिंग में हिस्सा लिया और हमारे महिला और पुरुष वर्ग ने बेहतर प्रदर्शन किया। एलिश में भारत के छह पुरुष और तीन महिला मैदान में उतरे, मास रेसलिंग में 12 पुरुष और दो महिला खिलाड़ी और कज़ाक कुरैश में भारत की तरफ़ से पाँच पुरुषों ने प्रतिनिधित्व किया।
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तकनीक में मामूली फ़र्क- विक्रम भोगड़े
भारतीय टीम के उप प्रमुख विक्रम भोगड़े ने कहाकि मूल रूप से कुश्ती और फ्री स्टाइल रेसलिंग के फ़ॉर्मेट और इन खेलोे में अधिक अंतर नहीं है लेकिन हमें और अभ्यास और कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। उन्होंने कहाकि हालांकि भारत में एलिश, कज़ाक कुरैश या मास रेसलिंग के लिए काफ़ी कम ट्रेनिंग और प्रोत्साहन है लेकिन यदि पूरी सुविधाएँ दी जाएँ तो हम काफ़ी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
 
भारत में काफ़ी संभावनाएँ- दीपेश जारभालो
मास रेसलिंग के लिए खेलने आए भारतीय खिलाड़ी दीपेश जारभालो ने कहाकि भारत में एलिश, कज़ाक कुरैश और मास रेसलिंग के लिए काफ़ी प्रतिभाएँ हैं और भारत के लिए यह मुश्किल नहीं कि वह इन रूस और मध्य एशियाई खेलों को नहीं खेल पाए। दीपेश ने कहाकि हमारे पहलवानों को मूल कुश्ती की अनुभव है, यदि उसमें रूस की तकनीक और ट्रिक की ट्रेनिंग हो जाए तो इन खेलों में पदक लाना कोई मुश्किल बात नहीं।
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क्या हैं यह तीन खेल
एलिश बेल्ट पहलवानी का नाम है जो रूस में काफ़ी लोकप्रिय है। इसमें खिलाड़ी को प्रतिद्वन्द्वी की बेल्ट पकड़कर उसे गिराना होता है।
किर्गिज़ कुरोश भी काफ़ी हद तक एलिश जैसा ही खेल है लेकिन इसके बेल्ट और तकनीक में अन्तर होता है।
मास रेसलिंग रूस के यकूतिया का खेल है जिसमें दो खिलाड़ी लकड़ी के फट्टे का सहारा लेकर डंडे से ज़ोर आज़माइश करते हैं।
 
रंगारंग समापन के लिए तैयार चोलपोन अता
एक सप्ताह तक चले टूर्नामेंट में 20 खेल के लिए मेज़बार किर्गिज़िस्तान और भारत समेत क़रीब 60 देश इस टूर्नामेंट में शरीक़ हुए। शुक्रवारको इसका समापन हो जाएगा। राष्ट्रपति अलमाज़बेक अतामबायेव ने सभी टीमों को शुभकामनाएँ दीं। उम्मीद है अगला टूर्नामेंट साल 2018 में किर्गिज़िस्तान में होगा।

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