मुंबई,भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में फिलहाल सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान की जो हैसियत है, किसी अन्य सितारे की नहीं है। तीनों ने 50 वर्ष की आयु पार कर ली है। तीनों इस स्थिति में हैं कि अकेले दम पर फिल्म हिट करा सकते हैं। बीते 10 सालों का चलन ये भी है कि इनकी कोई फिल्‍म असफल नहीं हुई है, बल्कि नया चलन ये है कि ये तीनों फिल्म के 100 करोड़ की कमाई की गारंटी हो गए हैं।

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फोर्ब्स की सूची के मुताबिक जहां सलमान खान साल में 213 करोड़ रुपये कमा लेते हैं। वहीं शाहरुख खान 165 करोड़ तक कमा लेते हैं। आमिर खान की बीते साल कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई, फिर भी उनकी कमाई 100 करोड़ पार है।

तीनों खानों के चाहने वालों की बात करें तो ट्विटर पर शाहरुख खान को 17.3 मिलियन यानी एक करोड़ 73 लाख लोग फॉलो करते हैं। आमिर खान के 16.1 मिलियन यानी एक करोड़ 61 लाख फॉलोवर हैं। जबकि सलमान को 15.7 मिलियन यानी एक करोड़ 57 लाख लोग फॉलो करते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ही हैं, जो 17.3 मिलियन फॉलोवर संख्या के साथ इन्हें टक्कर दे सकते हैं। वरना कोई ऐसी हस्ती नहीं, जिनकी इतनी लोकप्रियता हो। ऐसी स्थिति में आने के बाद इन्होंने बीते 10 सालों में सिनेमा को क्या दिया है? इनके फिल्मों के चुनाव के क्या पैमाने हैं? सिनेमा को लेकर इनका क्या नजरिया है?

उम्र की समानताओं के अलावा सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान में एक समानता ये भी कि तीनों 1990 के दशक में चमके। कुछ साल आगे-पीछे तीनों ने ऐसे समय पर कैरियर शुरू किया, जब बॉलीवुड में एक खास तरह की फिल्में बनाने का चलन था। वो खास तरह था, व्यावसायिक सिनेमा। ऐसी फिल्‍में बनाना जो लोकप्रिय हों, बॉक्स ऑफिस पर सफल हों। फिल्म जगत के जानकार बताते हैं कि उन 10 सालों में सिनेमाई उत्‍थान के लिहाज से कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ।

लेकिन 2000 के बाद इसमें परिवर्तन आया, तकनीकी तौर पर भी और फिल्म देखने के दर्शकों के नजरिए में भी। इस दौर में कई शीर्ष निर्देशक, अभिनेता सिरे से नकार दिए गए, जो परिर्वतनशील नहीं थे। तीनों खान भी इस दौर के शिकार हुए।

साल 2000 से 2005 के बीच सलमान खान ने छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 19 फिल्‍में की। जिनमें 2004 में आई ‘गर्व’ और 2005 आई ‘नो एंट्री’ ही कुछ सफल हो पाईं, बाकी 17 फिल्में फ्लाप। माना जाने लगा था कि सलमान युग खत्म हो गया। जबकि 2001 में दो सुपरहिट ‘लगान’, ‘दिल चाहता है’ के बाद आमिर ने 2004 तक कोई फिल्म ही नहीं की; 2005 लौटे से तो फ्लॉप ‘मंगल पांडे, द राइजिंग’ के साथ। कई आलोचकों ने लिखा कि अब आमिर में वो चमक नहीं रही।

इस समयावधि में शाहरुख ने 23 फिल्में कीं। लेकिन बीच-बीच में उन्हें एक-एक हिट मिलती रहीं। 2000 में ‘मोहब्बतें’, 2002 में ‘देवदास’, 2003 में ‘कल हो न हो’, 2004 में ‘मैं हूं ना’, ‘वीर जारा’, ‘स्वदेश’ और 2005 में ‘पहेली’।

लेकिन समय की नजाकत पहचानते हुए तीनों खानों ने खुद को बदला। साल 2005 तक कोई खान उतना बड़ा स्टार नहीं हुआ था। थोड़ी बहुत‌ शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन में लड़ाई चला करती थी कि किसकी स्टारडम ज्यादा है। लेकिन बीते 10 सालों में तीनों ने ऐसे काम किए कि लोगों ने तीनों को सिर-आंखों पर बिठा लिया। अगली स्लाइड में जानते हैं इन 10 सालों में इन तीनों ने किया क्या?

चार साल के अंतराल और ‘मंगल पांडेः द राइजिंग’ के फ्लॉप होने के बाद आमिर खान समझ गए। उन्होंने साल 2006 में ओम प्रकाश मेहरा की ‘रंग दे बसंती’ जैसी प्रयोगधर्मी फिल्‍म की। इसने उनके दामन पर लगे फ्लॉप के दाग को धो दिया। इसी साल आई ‘फना’ ने उन्हें एक बार फिर से स्टार बना दिया। लेकिन आमिर यही नहीं रुके।

साल 2007 में आमिर ने ‘तारे जमीं पर’ जैसी प्रयोगधर्मी फिल्म बनाकर लोगों का दिल जीत लिया। इस फिल्म में उन्होंने न केवल अभिनय किया, बल्कि निर्देशन और इसके निर्माता भी बने। यही वो दौर था, जब उनके प्रतिद्वंदी अभिनेता मजबूत गठीले शरीर बनाने लगे, तो 2008 में उन्होंने एट पैक (गजनी) बनाकर सबको चौंका दिया।

2009 में आमिर ने 43 साल की उम्र में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 20-22 वर्ष के छात्र (3 इडियट्स) का किरदार निभाकर साबित कर दिया कि वो इंडस्ट्री के सबसे लगनशील अभिनेता हैं। साल 2014 में ‘पीके’ बनाई। यह भारत की अब तक की सबसे लोकप्रिय फिल्‍म है। बीते दो सालों से वे एक असल जिंदगी के किरदार महावीर सिंह भगत की जिंदगी पर फिल्म ‘दंगल’ बना रहे हैं।

इस बीच में उन्होंने तलाश और धूम 3 जैसी फिल्‍में भी की थीं। लेकिन बीते 10 सालों के आमिर के फिल्‍मी कैरियर की बात करें तो उन्होंने लगातार अपने किरदार निभाने के लिए लगातार मेहनत की है। अपनी हालिया फिल्‍म के लिए तो उन्होंने 35 किलो तक वजन बढ़ा लिया था।

शाहरुख ने साल 2006 में ‘कभी अलविदा ना कहना’ और ‘डॉन’ की। इनमें उन्होंने अपनी पुरानी कला को दोहराया। साल 2007 में शाहरुख ने ‘चक दे इंडिया’ कर के जता दिया कि वह इंडस्ट्री के सबसे उम्मा कलाकार हैं। लेकिन 2007 से ही शाहरुख का नजरिया बदलने लगा, उनकी फिल्म ‘ओम शांति ओम’ बड़ी हिट साबित हुई। खास बात ये कि इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर इतने पैसे कमाए, जितनी शाहरुख की कोई फिल्‍म नही कमा पाई थी। इसमें शाहरुख ने 6 पैक बना कर दिखाए।

बस यही से शाहरुख का कैरियर व्यावसायिक फिल्मों की तरफ मुड़ने लगा। साल 2008 में शाहरुख की ‘रब ने बना दी जोड़ी’ सफल रही। इन सब में शाहरुख ने अपनी बनी-बनाई छवि का फायदा उठाया। लेकिन साल 2010 में शाहरुख ने ‘माई नेम इज खान’ में रोगी के किरदार के साथ इस कदर न्याय किया कि फिर से अभिनय के लिए उनकी वाह-वाही होनी लगी।

लेकिन 2011 में डॉन 2, अगले साल ‘जब तक है जान’, 2013 में चेन्नई एक्सप्रेस, 2014 में हैप्पी न्यू ईयर और 2015 में दिलवाले। शाहरुख ने पूरी तरह से रंग बदल दिया। उन्होंने बस ऐसी फिल्‍में चुननी शुरू कर दीं, जो व्यावसायिक तौर पर अच्‍छा प्रदर्शन करें। बीते पांच सालों में शाहरुख ने कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसे बहुत दिनों तक याद रखा जाए। उनकी आने वाली फिल्में ‘फैन’ और ‘रईस’ भी इसी श्रेणी की फिल्‍में हैं।

खुद शाहरुख ने इंटरव्यू के दौरान कई बार ये स्वीकार ‌किया है कि उनका ध्यान अब केवल व्यावसाय‌िक सिनेमा की तरफ है।

सलमान 2005 से पहले बुरी तरह फ्लॉप हो चुके थे। इस साल आई ‘नो एंट्री’ भी उनकी वापसी नहीं करा पाई। वह लगातार बिना सिर-पांव की फिल्‍में करते रहे। साल 2007 में उनकी फिल्म ‘पार्टनर’ सफल हुई। लेकिन सलमान ने इसमें भी अपनी पुरानी आदत शर्ट उतारने के अलावा कुछ खास नहीं किया था, जिसके दम पर उन्हें अभिनय आधारित किरदार के लिए चुने।

नतीजा ये कि सलमान को खुद अपने लिए फिल्‍म लिखने की नौबत आ गई। उन्होंने एक बेहद महत्वकांक्षी फिल्म बनाई जिसे खुद लिखा ‘वीर’ लेकिन यह भी बुरी तरह से फ्लॉप। लेकिन तभी प्रभु देवा की नजर सलमान पर पड़ी। उन्होंने सलमान की एक्‍शन फिल्में देखी थीं, उनका बड़ा मना था कि अपने क्षेत्र यानी दक्षिण की कुछ फिल्मों (जो कि एक्‍शन के लिए जानी जाती हैं) को बॉलीवुड में बनाया जाए।

उन्होंने वांटेड नाम की एक फिल्‍म शुरू की। साल 2009 में आई इस फिल्म ने सलमान को फिर से बुलंदियों पर लाकर खड़ा कर दिया। साल 2010 में ‘दबंग’, 2011 में ‘रेडी’ 2011 में ‘बॉडीगार्ड’, 2012 में ‘एक था टाइगर’, इसी साल ‘दबंग 2’, साल 2014 में ‘किक’, साल 2015 में ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘प्रेम रतन धन पायो’ ने सलमान को शाहरुख-आमिर के बराबरी में क्या, कमाई के मामले में उन्हें पीछे छोड़ दिया।

सलमान की ये सारी फिल्में उत्तर भारतीयों के सिर चढ़कर बोलीं। बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। लेकिन विषयवस्तु और अभिनय स्तर पर यह किसी 1990 की फिल्म की तरह ही थीं। पत्रकार अर्णव गोस्वामी को दिए गए एक साक्षात्कार में सलमान ने खुद माना की ये सारी फिल्में 1990 या 1980 के दशक की सी थीं।

साभार अमर उजाला


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