मदरसा तूल-सलाहाइ ट्रस्ट
साभार: सुप्रिया सोगले

अपनी मधुर आवाज़ से लोगों का दिल जीतने वाले गायक सोनू निगम ने सोमवार की सुबह लाउडस्पीकर पर बजने वाली अज़ान पर टिप्पणी कर विवाद मोल ले लिया है. उन्होंने कहा की किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल थोपी हुई धार्मिकता है.

सोनू निगम के इस ट्वीट से एक बहस छिड़ गई की क्या कुछ ही मिनट की अज़ान से लोगों को तकलीफ़ होती है? तो क्या सोनू निगम अपने घर के पास की मस्जिदों से सुनाई जाने वाली अज़ान से परेशान हुए? इस सवाल के जवाब के लिए मैं बुधवार को भारतीय समयानुसार सुबह पांच बजे सोनू निगम के घर पहुँची.

उनका घर अंधेरी के वर्सोवा इलाके में है और ज़ाहिर है वहां उस समय अंधेरा छाया हुआ था. आम तौर पर व्यस्त रहने वाली मुंबई की सड़कें खाली और सुनसान पड़ी थीं. सोनू निगम के दो मंज़िला घर के सामने पहुंची तो देखा कि वहाँ मीडिया का जमावड़ा था.

सोनू निगम के घर की लाइट्स बंद थीं और उनके घर के बाहर पुलिस की गाड़ी तैनात थी. दो पुलिस वाले गाड़ी के बाहर खड़े थे. मेरे जैसे दूसरे पत्रकार भी शांति से इंतज़ार कर रहे थे कि कहीं से उन्हें अज़ान की आवाज़ सुनाई दे पर किसी को सुनाई नहीं दी.

धीरे-धीरे सभी मीडियाकर्मी वहां से चले गए. करीबन आधे घंटे तक मैंने सोनू निगम के घर के सामने बैठकर अज़ान की आवाज़ का इंतज़ार किया पर मेरे कानों को वहाँ से गुज़र रहे कुछ वाहनों की ही आवाज़ें मिलीं. पूछताछ से पता चला की उस क्षेत्र में तीन मस्जिदें है पर ये सभी सोनू निगम के घर से 600 मीटर की दूरी पर हैं.

उनके घर के बाईं तरफ़ करीबन आधे किलोमीटर की दूरी पर मदरसा तालिमुल क़ुरान ट्रस्ट मस्ज़िद है जिसकी आज अज़ान सुबह पांच बजकर 20 मिनट पर हुई.

मस्ज़िद के ट्रस्टी मेहबूब खान ने बीबीसी से कहा, “सोनू निगम अभी दो चार साल पहले रहने आए हैं और हम यहाँ 30-35 साल से हैं. पहले किसी ने अज़ान को लेकर तकलीफ़ ज़ाहिर नहीं की. सोनू निगम जहाँ रहते हैं वहाँ तो हमारे अज़ान की आवाज़ जाती भी नहीं है.”

सोनू निगम की बात से आहत हुए मेहबूब खान आगे कहते हैं, “हमें लोग कहते हैं कि अज़ान से उन्हें फ़ायदा होता है. लोग समय पर उठकर अपने कामकाज कर पाते हैं. सोनू निगम सिर्फ माहौल ख़राब कर रहे हैं. ये सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट है.” सोनू निगम के घर की दाईं तरफ़ मदरसा तूल-सलाहाइ ट्रस्ट और मदरसा-ए-नबवैआह है.

मदरसा तूल-सलाहाइ ट्रस्ट में काम करने वाले हबीब ने साफ़ किया कि उनकी मस्ज़िद में लाउडस्पीकर का इतेमाल होता ही नहीं है.  वहीं मदरसा-ए-नबवैआह के ट्रस्ट्री गुलाम जी ने बुधवार सवा पांच बजे की अज़ान की पुष्टि की.

सोनू निगम के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए गुलाम जी ने कहा- “सोनू निगम पहले सिर्फ़ हज़ार रुपये के लिए जागरण में रात भर गाना गाया करते थे. वो भूल गए हैं कि उन्होंने कितने लोगो को तकलीफ़ दी है. ये सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं. अब सब नए सिंगर आ गए हैं और अब उन्हें गाने नहीं मिलते.”

सोनू निगम के घर के पास वाली ‘त्रिशूल’ नामक इमारत पर रहने वाली लता सचदेव ने बीबीसी को बताया की उन्हें पूरे दिन कभी भी अज़ान की आवाज़ सुनाई नहीं देती. वहीं पास की इमारत में रहने वाली महिला किरण वासन का कहना है कि उन्होंने सुबह की अज़ान आज तक नहीं सुनी.

सह साभार


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