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शहूर गीतकार और शायर जावेद अख्तर ने ‘पद्मावती’ की कहानी की ऐतिहासिक को ख़ारिज करते हुए कहा कि पद्मावती का इतिहास में कोई जिक्र नहीं है.

उन्होंने कहा कि इसकी कहानी उतनी ही नकली है, जितनी सलीम अनारकली की. इसका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है. उन्होंने कहा, अगर लोगों को वाकई इतिहास में अधिक रुचि ही है, तो इन फिल्मों की बजाए गंभीर किताबों से समझाना चाहिए.

जावेद अख्तर ने कहा, “मैं इतिहासकार तो हूं नहीं, मैं तो जो मान्य इतिहासकार हैं. उनको पढ़कर आपको ये बात बता सकता हूं. उन्होंने बताया, “टीवी पर इतिहास के एक प्रोफेसर को सुन रहा था. वो बता रहे थे कि ‘पद्मावती’ की रचना और अलाउद्दीन खिलजी के समय में काफी फर्फ था. जायसी ने जिस वक्त इसे लिखा और खिलजी के शासनकाल में करीब 200 से 250 साल का फर्क था. इतने साल में जब तक कि जायसी ने पद्मावती नहीं लिखी, कहीं रानी पद्मावती का जिक्र ही नहीं है.

गीतकार ने कहा, ‘उस दौर (अलाउद्दीन के) में इतिहास बहुत लिखा गया. उस जमाने के सारे रिकॉर्ड भी मौजूद हैं, लेकिन कहीं पद्मावती का नाम नहीं है. अब मिसाल के तौर पर जोधा-अकबर पिक्चर बन गई. जोधाबाई ‘मुगल-ए-आजम’ में भी थीं.

उन्होंने कहा, तथ्य है कि जोधाबाई, अकबर की पत्नी नहीं थी, अब वो किस्सा महशूर हो गया. मगर हकीकत में अकबर की पत्नी का नाम जोधाबाई नहीं था, कहानियां बन जाती हैं उसमें क्या है.


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