संगीत उद्योग में 25 साल पुरे कर रहे ऑस्कर और ग्रेमी पुरूस्कार विजेता संगीतकार ए आर रहमान ने कहा कि उनके धार्मिक विश्वासों ने उनके करियर को परिभाषित और आकार देने में मदद की है. याद रहे एआर रहमान ने 23 साल की उम्र में 1989 में इस्लाम क़बूल किया था.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए ख़ास इंटरव्यू में उन्होंने कहा, कहा, ”इस्लाम एक महासागर है. इसमें 70 से ज़्यादा संप्रदाय हैं. मैं सूफ़ी दर्शन का पालन करता हूं जो प्रेम के बारे में है. जो भी हूं वो उस दर्शन की वजह से हूं जिसका मैं और मेरा परिवार पालन करता है. ज़ाहिर है कई चीज़ें हो रही हैं और मैं महसूस करता हूं कि ये ज़्यादातर राजनीतिक हैं.”

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रहमान ने कहा, ”अगर आप एक ऑर्केस्ट्रा में होते हैं तो एक किस्म का विशेषाधिकार भी होता और नहीं भी होता है क्योंकि आप साथ में परफॉर्म कर रहे होते हैं. एक साथ परफॉर्म करने का मतलब है अलग-अलग रेस में दौड़ना. हमलोग अलग-अलग मजहब के होते हैं और एक साथ परफॉर्म करते हैं. हमारे भीतर से एक ही आवाज़ आती है. आप एक लय के साथ काम करते हैं.”

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50 वर्षीय कलाकार, जिन्होंने दो ऑस्कर, दो ग्रामी और गोल्डन ग्लोब जीते हैं, उनके नाम पर 160 से ज्यादा फिल्म साउंडट्रैक हैं, जिनमें ऑस्कर जीतने वाले “स्लमडॉग मिलियनेयर” और बॉलीवुड फिल्मों “लगान” और “ताल” शामिल हैं. वह इकलोते संगीतकार है जो खुद गाते हैं, संगीत देते हैं, संगीत लिखते हैं और मिक जैगर, सारा ब्राइटमैन और पुसीकैट डब्लूएसएल सहित अन्य वैश्विक कलाकारों के साथ मिलकर काम करते हैं.

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