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बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान ने हाजी अली दरगाह पर बंबई उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय ने अपने फैसले में महिलाओं को दरगाह के प्रतिबंधित मजार क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दे दी है जो कि हदीस और कुरान के मुताबिक है.

उन्होंने कहा, “मजार और दरगाह कब्रें हैं और पुरुष और स्त्रियां दोनों यहां जा सकते हैं. किसी तरह का लिंग भेद नहीं है. मुल्लाओं और मौलवियों ने बेहद सुलझे हुए इस्लाम धर्म को उलझा दिया है. उन्होंने कहा कि फतवा भी वैसा फैसला नहीं है जैसा लोग सोचते हैं. यह इस्लामिक धर्म गुरुओं द्वारा दिया जाने वाला ओपिनियन हैं.”

इस मामले में सलीम ने ट्वीट करके कहा, “हाजी अली पर हाई कोर्ट का फैसला उन्हीं बातों का समर्थन करता है जो हदीस और कुरान में कही गई हैं. एक अच्छा मुस्लिम होने के लिए आपको एक अच्छा इंसान होना पड़ेगा”

उन्होंने कहा, “मजार और दरगाह में पुरुष और महिलाएं दोनों ही जा सकते हैं, क्योंकि इस्लाम में कोई लैंगिक भेदभाव नहीं है. ‘मुल्ला और मौलवी’ इस्लाम जैसे सरल धर्म को जटिल बना रहे हैं.” सलीम ने कहा, ‘यहां तक कि फतवा भी कोई फैसला नहीं है, जैसा कि लोग सोचते हैं. यह इस्लामी विद्वानों द्वारा दी गई राय होती है.’


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