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गीतकार जावेद अख्तर ने तीन तलाक के मुद्दे पर कहा कि तीन तलाक देने वालें मुसलमान नहीं हैं.  उन्होमे कहा कि ऐसा करने वाले इस्लामिक नहीं हैं. दुनिया में जो भी प्रमुख इस्लामिक देश हैं, उन्होंने भी इसे बैन कर दिया तो धर्म निरपेक्ष भारत में ऐसा क्यों हो रहा है.

जयपुर में एक समाचार पत्र से बातचीत में उनहोंने कहा कि अगर हम मान भी लें कि ये इनका धर्म है तो कुरान में ऐसा नहीं लिखा है. दुनिया में जो भी प्रमुख इस्लामिक देश हैं, उन्होंने भी इसे बैन कर दिया तो धर्म निरपेक्ष भारत में ऐसा क्यों हो रहा है. इनसे पूछो कि अमेरिका, सिंगापुर, इंग्लैंड में रहते हो तो क्या वहां ऐसा कर सकते हो?

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जावेद ने कहा कि इस मुल्क में अगर अलग-अलग कम्युनिटी के पर्सनल लॉज हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है. मगर धर्मनिरपेक्ष जनतंत्र वाले देश में सबसे सुप्रीम चीज हमारा संविधान है. हिंदू, क्रिश्चन या मुसलमानों का पर्सनल लॉ हो, लेकिन अगर वह संविधान को क्लैश करता है तो वह संविधान का अंतरविरोधी हो जाएगा.

उन्होंने खुद को नास्तिक बताते हुए कहा कि मुझे किसी धर्म की बातें समझ नहीं आती है ना ही मैं कोई फेस्टिवल मनाता हूं. मैं नास्तिक हूं. इरफ़ान खान द्वारा कुर्बानी को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि उसके बारे में मेरा ये मानना है कि कुर्बानी, बलिदान अच्छी बात है लेकिन किसी भी खास त्योहार पर क्यों, ये तो कभी भी दी जा सकती है

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