दिग्‍गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने देश के मौजूदा हालात पर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा, आज के दौर में जब सोशल मीडिया पर धर्म, जाति और देश को लेकर इतनी असहिष्णुता फैली हुई है, नसीरुद्दीन शाह मानते हैं कि कुछ लोगों के गुनाहों की सज़ा आज हम सब झेल रहे हैं.

आज के दौर पर चिंता जताते हुए नसीर का कहना है कि आज से पहले इस देश में कभी भी शांति और एकता फैलाने वाली समझदारी भरी बातों को बुज़दिली या देशद्रोह नहीं समझा गया था. अगर एक मुस्लिम होकर कोई भारत-पाकिस्तान की दोस्ती की बात करता है तो उसे पाकिस्तानी कह दिया जाता है.

नसीर कहते हैं कि यह बात उन्हें बेहद चौंकाती है कि फ़ेसबुक पर न्यूक्लियर युद्ध से जुड़ी चेतावनियों को तो बहुत कम लाइक मिलते हैं लेकिन इस्लाम विरोधी बातें बहुत पसंद की जाती हैं. देश के बंटवारे के बाद जवान हुई पीढ़ी के अधिकतर लोगों की तरह बचपन से उन्होंने मुसलामानों और सिखों की आपसी दुश्मनी की बातें सुनी थीं. लेकिन उन्हें अपने दोस्तों के बीच कभी भी इस बात का एहसास नहीं हुआ.

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उन्होंने कहा, ‘ मुझे लगता है कि भारतीय मुस्लिमों को अब ‘पीड़‍ित’ की मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए, जिसमें वह अभी हैं, यह बड़ी आसानी से सब को एक जाल में धकेल रहा है, हमें प्रताड़‍ित महसूस करना बंद करना चाहिए, हमें यह उम्‍मीद बंद करनी चाहिए कि कहीं से कोई अवतार होगा और अब इस मसले को सीधे अपने हाथ में लेना चाहिए. कम से कम कोई हमारी भारतीयता पर सवाल न उठा सके और इस देश पर हमारा कम हक है, यह न जता सके.’

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शाह ने भारतीय मुसलमानों की स्थिति पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए लिखा, ‘मुस्लिम आक्रां‍ताओं ने सैकड़ों साल पहले देश को किस हद तक नुकसान पहुंचाया, इस बात को देश में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए भगवा ब्रिगेड को अपना दिमाग दौड़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ी. उन्‍होंने सिर्फ उन पुराने किस्‍सों को पूरी शिद्दत से लोगों तक पहुंचाया और भारतीय मुस्लिमों को सालों पुराने काम की सजा देते हुए दोयम दर्जे का नागरिक घोषित कर दिया गया. हम, जो उन अक्रां‍ताओं के वंशज हैं, भले ही हमारा भी खून इस देश के लिए उतना ही अपना है, पीढ़‍ियों बाद हमें उन कामों की सजा के लिए दोषी ठहरा दिया गया है.’

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इसी के साथ उन्होंने कहा,  देशभक्ति कोई ऐसा टॉनिक नहीं है जिसे किसी के गले में जबरदस्ती डाला जाए। आज भारतीय मुसलमान सबसे कमजोर आर्थिक और शैक्षिक स्थिति में है लेकिन फिर भी उसके लिए आज सानिया मिर्जा की स्कर्ट की लंबाई इन सब बातों से ज्यादा मायने रखती है। आज का मुसलमान ISIS के पागलपन की निंदा नहीं करता है ठीक उसी तरह जैसे बहुत से हिंदू गौरक्षकों द्वारा किसी मुसलमान को मार दिये जाने की निंदा नहीं करते हैं


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