मुंबई | भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी यदा कदा किसी न किसी फिल्म को लेकर चर्चा में बने रहते है. फिल्म को सर्टिफिकेट देने के लिए वो कब कैसी मांग कर डाले यह किसी को नही पता. फिल्म उड़ता पंजाब के समय से शुरू हुआ यह सिलसिला अब अरविन्द केजरीवाल के ऊपर बनी फिल्म तक जा पहुंचा है. सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को सर्टिफिकेट देने के लिए बेहद ही अजीब मांग रखी है.

अरविन्द के केजरीवाल के ऊपर बनी फिल्म को दो फ़िल्मकार खुशबु रांका और विनय शुक्ला ने बनाया है. यह एक हिंदी इंग्लिश डॉक्युमेंट्री है जिसको शीर्षक दिया गया है ‘एन इनसिग्नीफीकेंट मैंन ‘. यह फिल्म अभी तक दुनियाभर के 40 फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई जा चुकी है. आने वाले कुछ हफ्तों में इस फिल्म को ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका में दिखाई जाएगी.

अभी हाल ही में इसको टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया है. खुशबु ने बताया की हमने इस फिल्म को सर्टिफिकेशन के लिए फ़रवरी में सेंसर बोर्ड के पास भेजा था. इसके बाद फिल्म स्क्रीनिंग खत्म होने के बाद बोर्ड के सदस्यों ने हमें कुछ नही बताया. इसके बाद हमने उनसे पुछा की क्या कोई परेशानी है तो उन्होंने कहा की एक चिट्ठी भेजकर तुम्हे सब कुछ बता दिया जायेगा. करीब दस दिन बाद हमें वो चिट्ठी मिली.

मुंबई मिरर से बात करते हुए खुशबु ने कहा की इस चिट्ठी में लिखा था की हमें मोदी, केजरीवाल और शीला दीक्षित से एनओसी लेकर आना होगा तभी हमें सर्टिफिकेट मिलेगा. इसके बाद हम इसी सिलसिले में पहलाज निहलानी से मिलने गए लेकिन उन्होंने हमें अपने ऑफिस बाहर फिंकवा दिया और हमारी बात नही सुनी. जबकि हमने फिल्म में जो भी क्लिप उसे की है वो सभी चैनल पर पहले ही दिखाई जा चुकी है.

खुशबु ने आगे कहा की सेंसर बोर्ड का काम फिल्म को सर्टिफिकेट देना है, उसे नेताओं की तरह वाचडॉग बनने की जरुरत नही है. अगर किसी नेता को हमसे परेशानी है तो वो हम् पर कोर्ट में केस कर सकता है. अब निहलानी जी चाहते है की मोदी जी सेंसर चीफ का भी काम करे. उधर निहलानी ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा की करन जोहर और जॉली एलएलबी के निर्माताओ को भी ऐसा करने के लिए कहा गया था.


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