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प्रशासन की तरफ से जारी नोटिस में कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद कार्यक्रम करने पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया है. साबरमती ढाबा के पास अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन एबीवीपी के कुछ बागी छात्रों ने प्रतियां जलाईं थी.

जेएनयू प्रशासन ने पांच छात्रों को नोटिस जारी कर प्राचीन कानूनी दस्तोवज मनुस्मृति की प्रतियां जलाने के सिलसिले में उनकी ‘‘स्थिति’’ स्पष्ट करने को कहा था. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी थी.

प्रॉक्टर की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है, ‘‘मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से नौ मार्च को एक रिपोर्ट मिली है, जो आठ मार्च को साबरमती ढाबे के पास शाम करीब साढ़े बजे के करीब हुई घटना के बारे में है. रिपोर्ट मुख्य प्रॉक्टर के कार्यालय को मिली है.’’ उसमें कहा गया है, ‘‘आपको इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 21 मार्च को प्रॉक्टर के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया जाता है. आप अपने बचाव में यदि कोई साक्ष्य देना चाहते हैं, तो उसे भी साथ ला सकते हैं.’’

गौरतलब है कि छात्रों को इस कार्यक्रम के लिए जेएनयू प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी. प्रशासन की तरफ से जारी नोटिस में छात्रों से कहा गया है कि प्रशासन की मनाही के बाद भी कार्यक्रम का आयोजन क्यों किया गया, इस पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है.

नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि छात्र अपना पक्ष रखने के लिए कोई सबूत पेश करना चाहें तो कर सकते हैं.

अफजल गुरू को फांसी दिए जाने क संबंध में हुए विवादित कार्यक्रम के कुछ ही सप्ताह बाद एबीवीपी के कछ बागी सदस्यों ने आईसा और एनएसयूआई के साथ मिलकर आठ मार्च को साबरमी ढाबे के पास मनुस्मृति का एक हिस्सा जलाया. अफजल गुरू वाला कार्यक्रम भी यहीं हुआ था.

कार्यक्रम के आयोजकों में से तीन एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी थे, जबकि उनमें से दो पार्टी के साथ होते हुए भी, मनुस्मृति पर उनके रूख से इत्तेफाक नहीं रखते. छात्रों ने पुस्तक की प्रतियां जलाने से पहले उसमें लिखी महिलाओं के प्रति कथित ‘‘अपमानजनक’’ टिप्पणियों को पढ़ा भी था.


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