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Sunday, October 22, 2017
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पाठको के लेख

रवीश कुमार लोककल्याणकारी कार्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ख़र्च करने के लिए सरकार को पैसे चाहिए। व्हाट्स अप यूनिवर्सिटी और सरकार की भाषा एक हो चुकी है। दोनों को पता है कि कोई फैक्ट तो चेक करेगा नहीं। नेताओं को पता है कि राजनीति में फैसला बेरोज़गारी, स्वास्थ्य और शिक्षा...
2022 में बुलेट ट्रेन के आगमन को लेकर आशावाद के संचार में बुराई नहीं है। नतीजा पता है फिर भी उम्मीद है तो यह अच्छी बात है। मोदी सरकार ने हमें अनगिनत ईवेंट दिए हैं। जब तक कोई ईवेंट याद आता है कि अरे हां, वो भी तो था,उसका...
राम पुनियानी म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की प्रताड़ना पर अपना आक्रोश और विरोध जताने के लिए बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत सहित कई देशों में जंगी प्रदर्शन हुए। इस बार की हिंसा की शुरूआत अतिवादियों (अराकान रोहिंग्या सालवेशन आर्मी) द्वारा पुलिस और सेना की चैकियों पर हमले के साथ हुई। संयुक्त...
if-saddam-hussain-and-gaddafi-had-atom-bomb
अमेरिका द्वारा तबाह होने से पहले ईराक़ और लीबिया के लोगों का जीवनस्तर और नहीं तो दक्षिण यूरोपीय देशों पुर्तगाल-स्पेन की टक्कर का हुआ करता था । तबाह करने के बाद तीसरी दुनिया सी स्थिति हो गई है । महिलाएं जो पढ़ती थी, दफ्तर जाती थी, खेलकूद में भाग लेती...
सबके पास स्कूटी/मोटरसाइकल हो गयी पुराने बजाज चेतक वेस्पा स्कूटर आम मजूरों ने ले लिए वो खून की तरह तेल पीते हैं, साइकल से कोई चलना नहीं चाहता क्योंकि दिन में बस आठ नौ घंटे ही होते हैं उतने टैम में ही दिन के टास्क निपटाने हैं ! इस...
पुण्य प्रसून बाजपेयी तो सुप्रीम कोर्ट को ही तय करना है कि देश कैसे चले। क्योंकि चुनी हुई सरकारों ने हर जिम्मेदारी से खुद को मुक्त कर लिया है। तो फिर शिक्षा भी बिजनेस है। स्वास्थ्य सेवा भी धंधा है। और घर तो लूट पर जा टिका है। ऐसे में...
इजरायल के अपराध और फिलिस्तीनियों के नरसंहार की कहानी इस प्रकार है: हम अपने इस लेख मे अपने प्रिय पाठको के लिए 1948 से शुरू होने वाली कहानी के कुछ अपराधो का उल्लेख करेंगे जो मस्जिदुल अक्सा मे नमाजियो पर किए गए और उनके खून से मस्जिदुल अक़्सा की दीवारे...
देश की मीडिया अभी अपनी विश्वसनीयता के सबसे बड़े संकट से गुज़र रही है। इलेक्ट्रोनिक मीडिया हो या प्रिंट मीडिया, उसपर सत्ता और पैसों का दबाव वैसा कभी नहीं रहा था जैसा आज है। वज़ह साफ़ है। चैनल और अखबार चलाना अब अब कोई मिशन या आन्दोलन नहीं। राष्ट्र...
नासिर शाह (सूफ़ी) जुल्म जब चरम पर हो तो देखने वालो की रूह कांप जाती है. छोटे- मोटे सडक हादसे मे घायल व्यक्तियों को देखने मे लोगो का मुँह बिगड जाता है . आज के इस दौर मे महसूस होता है की दुर्घटनाओ मे घायल व्यक्तियों का दर्द उन लोगो...
रवीश कुमार दिल्ली में शनिवार को पेट्रोल 70.03 रुपया प्रति लीटर हो गया. पिछले आठ महीने में यह अधिकतम वृद्धि है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस अख़बार ने लिखा है कि जुलाई महीने से पेट्रोल की कीमतों में 6.94 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। डीज़ल के दाम में भी 4.73 प्रति...

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