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Tuesday, February 21, 2017
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पाठको के लेख

हिंदी सिनेमा देश के मुस्लिम समाज को परदे पर पेश करने के मामले में कंजूस रहा है और ऐसे मौके बहुत दुर्लभ ही रहे हैं जब किसी मुसलमान को मुख्य किरदार या हीरो के तौर पर प्रस्तुत किया गया हो. “गर्म हवा”,“पाकीज़ा”,“चौदहवीं का चांद”,“मेरे हुज़ूर”,“निकाह”,“शमा”, “नसीम”, “चक दे इंडिया”, “इक़बाल”,...
मुझे जोधपुर में कोई याद नहीं करता लेकिन मैं जोधपुर को बहुत याद करता हूं। मैंने सिर्फ एक बार यहां का सफर किया था और उस दौरान मैंने वह सबक सीखा जो ताउम्र याद रखूंगा। वह 2006 का साल था (उम्मीद करता हूं कि मेरी याददाश्त सही है!) और...
अन्य चार राज्यों के साथ साथ उत्तर प्रदेश में भी चुनाव की गहमागहमी है। सभी पार्टियों ने जनसमर्थन हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। प्रत्येक खीमा से दूसरे खीमा पर आरोपों की बारिश हो रही है और हर मोर्चा को स्टेज शो के...
इस हादसे में मरने वाले छोटे बच्चों की मौत से मुझे गहरा सदमा पहुंचा है। इस हादसे को लेकर मैं व्यक्तिगत रूप से दुखी हूं और पीढ़ा महसूस कर रहा हूं। हादसे में बच्चों को गवां देने वाले अभिभावकों के साथ मेरी पूरी संवेदना व सहानूभुति है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र...
यह एक आज़माया हुआ नुस्खा है, जिस ज़मीन के हिस्से को तहस नहस करना हो वहाँ किसी कट्टरपंथी को सत्ता सौंप दो।वोह खुद उपजाऊ ज़मीन को बंजर बनाकर छोड़ेगा। यक़ीन न हो तो पड़ोस के मुल्क़ से शुरू करो और जहाँ तक देख सकते हो उसके बाद भी देखते...
पठानो को सब एक सुर में कहते थे की यह लड़ाकू लोगों का झुँड है। यह लड़ते वक़्त इंसान और इंसानियत को भूल जाते हैं। पठानो में ताक़त ही दर्जे तय करती थी। बदला जितना खूँखार होगा उतना ही पठान की ताक़त के ढोल बजेंगे। तब किसने सोचा था...
"गर फिरदौस बर रूए ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त।" अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध कश्मीर के विषय में यह शेर अमीर खुसरो ने यूँ ही नहीं कहा था। कश्मीर को क़रीब से देखने पर आप भी इसे ईश्वर का वरदान ही कहेंगे।...
बादशाहों में एक बादशाह ऐसा भी हुआ जिसकी बादशाही के आगे इतिहास के सारे बादशाहों की बादशाही फीकी पढ़ जाती है और वो बादशाह थे..खान अब्दुल गफ्फार खान जिन्हें हिन्दुस्तान में बादशाह खान, पाकिस्तान-अफगानिस्तान में बाचा खान और दुनिया फ्रंटियर गांधी के नाम से जानती है। "इस्लाम के अहिंसक सिपाही"...
भारत में पुलिस और प्रशासन के कामों में राजनेताओं उनसे जुड़े लोगों और संगठनों का दखल कोई नया चलन नहीं है. इसकी वजह से अफसर और नौकरशाह सियासी देवताओं के मोहरे बनने को मजबूर होते हैं ऐसा वे कभी लालच और कभी मजबूरियों की वजह से करते हैं. पुलिस...
अगर खुदा मुझे बता दे कि इस कायनात में जन्नत कहां है तो भी मैं उसका पता नहीं पूछूंगा, क्योंकि मेरे पास मां है और मेरी जन्नत उसके कदमों तले है। अगर खुदा कह दे कि उसकी जन्नत में कोई दो मुल्क बनाने हैं तो मैं हिंदुस्तान और अफगानिस्तान...

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