38.4 C
New Delhi,India
Tuesday, May 23, 2017
Home पाठको के लेख

पाठको के लेख

तुर्की की एक कहावत है- जैसे ही कुल्हाड़ी जंगल में दाख़िल हुई, पेड़ों  ने कहा, "देखो, ये हम में से एक है." पिछले दिनों हिन्दुस्तान में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. जब तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन जिन पर अपने देश में तानाशाही शासन थोपने और...
देश 1857 के स्वाधीनता संग्राम की वर्षगांठ मना रहा है। इस मौके पर आज हम स्वाधीनता संग्राम के कई विस्मृत नायकों में एक मौलाना अहमदुल्लाह शाह फैज़ाबादी को याद करते हैं जिन्हें इतिहास ने वह दर्ज़ा नहीं दिया जिसके वे हक़दार थे। फ़ैजाबाद के ताल्लुकदार घर में पैदा हुए...
श्रीमान् नरेंद्र मोदीजी, आज हिंदुस्तान ने कश्मीर में फिर एक सपूत खो दिया। भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट उमर फयाज शहीद हो गए। आतंकियों ने निर्मम तरीके से उनकी हत्या की। इससे पहले छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हाथों वीरगति को प्राप्त हुए सीआरपीएफ जवानों की चिता ठंडी भी नहीं हुई थी...
क्या कुरआन में आतंकवाद फैलाने की शिक्षा दी गई है? मेरा यह लेख इसी सवाल पर आधारित है। इसे पढ़ते समय पाठक अपने विवेक का इस्तेमाल करें। ‘मैं उससे दया की भीख मांग रहा था लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ। उसने चाकू से मेरी उंगलियां काट दीं। मैंने अपनी...
यह एक जटिल और कन्फ्यूज़्ड समय है, जहां बदलाव की गति इतनी तेज और व्यापक है कि उसे ठीक से दर्ज करना भी मुश्किल हो रहा है. पूरी दुनिया में एक खास तरह की बैचनी महसूस की जा रही है. पुराने मॉडल और मिथ टूट रहे हैं. यहाँ तक...
अच्छी सूरत भी क्या बुरी शय है जिस ने डाली बुरी नज़र डाली. आदमी की सोच बदली है. लिहाज़ा ज़माने का नज़रिया भी बदल गया है. सबकी निगाहें तरक्की पर गड़ी हैं. और होड़ चौपायों के भागते झुंड की तरह मची है. ऐसे में उस तरक्की का मर्म क्या है....
मैं उस शख्स का बहुत अहसानमंद हूं जिसके दिमाग में सबसे पहले डिक्शनरी बनाने का खयाल आया। डिक्शनरी सिर्फ दो ज़बानों को ही नहीं जोड़ती, यह दो दिलों और देशों को भी जोड़ती है। मैं इस मामले में बहुत खुशनसीब रहा कि मुझे इनाम में डिक्शनरी बहुत मिलीं। इतनी...
सऊदी अरब के शाह सलमान ने युवराज अब्दुल्ला बिन फैसल बिन तुर्की को अमेरिकी राजदूत के पद से हटा कर अब  युवराज खालिद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज को नया राजदूत नियुक्त किया हैं. इस बारें में शाह सलमान ने आदेश जारी कर दिया हैं. वहीँ वाशिंगटन में सऊदी दूतावास की एक वेबसाइट में...
आजादी के बाद पिछले करीब सात दशकों के दौरान देश का विकास तो काफी हुआ है लेकिन इसमें सभी तबकों, समूहों की समुचित भागीदारी नही हो सकी है. देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समूह मुसलिम समुदाय की दोहरी त्रासदी यह रही कि वह एक तरफ तो विकास की प्रक्रिया...
नेक बनने और अपनी ख़ामियाँ पहचानने का तरीक़ा -इमाम मोहम्मद ग़ज़ाली अ़लैहिर्रहमा हुज़ूर सल्लल्लाहु तअ़ाला अ़लैहि वसल्लम का फ़रमान हैः जब अल्लाह तअ़ाला किसी बंदे के साथ भलाई का इरादा फ़रमाता है तो उसे उस के एैब दिखा देता है। (शोअ़बुल ईमान बैहक़ी, हदीस १०५३५) अपने एैब पहचानने के तरीक़ों में...

फेसबुक पर लाइक करें

ज़रूर पढ़ें

ताज़ा समाचार

सप्ताह की प्रमुख खबरें

error: Contents of Kohraam.com are copyright protected.