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Sunday, January 22, 2017
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पाठको के लेख

पठानो को सब एक सुर में कहते थे की यह लड़ाकू लोगों का झुँड है। यह लड़ते वक़्त इंसान और इंसानियत को भूल जाते हैं। पठानो में ताक़त ही दर्जे तय करती थी। बदला जितना खूँखार होगा उतना ही पठान की ताक़त के ढोल बजेंगे। तब किसने सोचा था...
"गर फिरदौस बर रूए ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त।" अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध कश्मीर के विषय में यह शेर अमीर खुसरो ने यूँ ही नहीं कहा था। कश्मीर को क़रीब से देखने पर आप भी इसे ईश्वर का वरदान ही कहेंगे।...
बादशाहों में एक बादशाह ऐसा भी हुआ जिसकी बादशाही के आगे इतिहास के सारे बादशाहों की बादशाही फीकी पढ़ जाती है और वो बादशाह थे..खान अब्दुल गफ्फार खान जिन्हें हिन्दुस्तान में बादशाह खान, पाकिस्तान-अफगानिस्तान में बाचा खान और दुनिया फ्रंटियर गांधी के नाम से जानती है। "इस्लाम के अहिंसक सिपाही"...
भारत में पुलिस और प्रशासन के कामों में राजनेताओं उनसे जुड़े लोगों और संगठनों का दखल कोई नया चलन नहीं है. इसकी वजह से अफसर और नौकरशाह सियासी देवताओं के मोहरे बनने को मजबूर होते हैं ऐसा वे कभी लालच और कभी मजबूरियों की वजह से करते हैं. पुलिस...
अगर खुदा मुझे बता दे कि इस कायनात में जन्नत कहां है तो भी मैं उसका पता नहीं पूछूंगा, क्योंकि मेरे पास मां है और मेरी जन्नत उसके कदमों तले है। अगर खुदा कह दे कि उसकी जन्नत में कोई दो मुल्क बनाने हैं तो मैं हिंदुस्तान और अफगानिस्तान...
सोशल मीडिया को भगवा ब्रिगेड ने हमेशा से ही झूठा प्रचार करने के लिए आधार बनाया हैं. जिसके दम पर वे हमेशा से ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मुसलमानों को टारगेट करते आये हैं. इस बार भगवा ब्रिगेड के निशाने पर प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं जिनका केंद्र की...
मनुष्य जीवन बिताने के लिए विभिन्न स्रोतों और कामों को अपनाता है, जो अगर शरई और नैतिक सीमा में हो तो निश्चित रूप से प्रशंसनीय है लेकिन अगर डगर से हटकर हो तो यही काम और सूत्र अपराध बन जाते हैं, उदाहरण के तोर पर इस्लामी सिच्छा के हिसाब...
इस्लाम धर्म में हज एक पवित्र यात्रा हैं. जो इस्लामिक साल के आखिरी महीने में अदा की जाती हैं. ये यात्रा सभी मुसलमानों को करना अनिवार्य नहीं हैं. हज यात्रा केवल उसी पर अनिवार्य हैं जो अपने दम पर अपने पैसों से हज कर सकता हैं. अन्यथा उस पर...
साल 1996 यानी आज से करीब बीस साल पहले का वक्त। मैं हमारे नजदीकी कस्बे के एक स्कूल का छात्र था। स्कूल ने हाॅस्टल शुरू किया और मेरा दाखिला वहां करवा दिया गया। इस फैसले का मैंने घोर विरोध किया। घर में जो मजे और जैसी खुराफातों के मौके...
सोचिये जिन्हें नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है, वे लोग ही नागरिकों के लिए खतरा बन जाएं तो क्या होगा? कल्पना कीजिए वह समाज कैसा होगा जहाँ रक्षक ही भक्षक बन गए हों? छत्तीसगढ़ हमेशा से ही आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण राज्य रहा है।...

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