नई दिल्ली (प्रेस विज्ञप्ति)। आला हजरत और एकता मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौक़ीर रज़ा खान ने सूफी सम्मलेन पे नाराज़गी का इज़हार करते हुये कहा है कि 17 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च को रामलीला मैदान में संपन्न होने वाली सूफी सम्मेलन के पीछे आरएसएस का हाथ है। इस सम्मेलन के माध्यम से मुसलमानों के बीच नफरत की राजनीति का खेल खेला जा ना है।सूफी सम्मलेन करवाने वाले उलेमाओ ने आरएसएस के कार्यालय में अपना ज़मीर गिरवी रख दिया उसे पूरे भारत का मुसलमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा ”।

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मौलाना ने मीडिया को जारी अपने बयान में कहा कि आज के दौर में कोई भी बात छिपी नहीं रहती किसी को भी मूर्ख नहीं बनाया जा सकता। इस सम्मेलन के संबंध में सभी जानते हैं कि इसके पीछे क्या खेल है। आरएसएस की योजना है कि मुसलमानों को पंथ के आधार पर लड़ाया जाए जिस डिवाइस कार के तौर आर पर कुछ लोगो का प्रयोग किया जा रहा है। मौलाना तौक़ीर रज़ा खान ने कहा कि इतिहास गवाह है कि सूफ़ी विद्वानों दरों पर राजाओं ने सिर झुका दिया है। कभी किसी सूफी ने किसी अमीर के दर वाज़े पर उपस्थिति नहीं दी। पहली बार ऐसा हो रहा है कि सूफीवाद के नाम पर प्रधानमंत्री और आरएसएस से मदद ली जा रही है। वह प्रधानमंत्री जिन पर गुजरात के 3000 मुसलमानों के नरसंहार का आरोप है। ऐसे में रहस्यवाद के नाम पर कुछ अंतरात्मा व्यापारी लोग मोदी सामने ज़मीर बेच दिए है जिसे मुसलमान कभी माफ नहीं करेंगे।

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मोदी के माध्यम से विज्ञान भवन में इस सम्मेलन का उद्घाटन उनके समर्थन के बराबर है मुल्क के सभी विद्वानों, सूफ़ी, मठों के ज़िम्मेदारों, इमामों और ज़िम्मेदार मदरसे इस आरएसएस नेक्सस न केवल विरोधी बल्कि इस सम्मेलन का बहिष्कार करे । मौलाना ने कहा कि सूफीवाद जैसे पवित्र शब्द का उपयोग करके भोली-भाली जनता की भावनाओं केासषसाल हर कीमत पर रोका जाना चाहिए। (headline24.in)

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