नई दिल्ली : भारत में पत्रकारिता के नाम पर खड़े किये जा रहे मीडिया संस्थान लोकतंत्र में अपनी भूमिका निभाने के बजाय किस तरह पैसे बनाने का जरिया बन गये इसका अंदाजा भारत के मीडिया संस्थानों चकाचौंध को देखकर लगाया जा सकता है। मीडिया संस्थान सत्ता और उद्योगपतियों के करीब जाकर अपनी ईमानदारी को बखूबी दिखा रहे हैं। भारत में वर्तमान में 90 फीसदी मीडिया संस्थानों पर पत्रकारों का नही बल्कि उधोगपतियों का ही कब्ज़ा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान में मीडिया की साख कम क्यों हुई है। क्यों लोग मीडिया से ज्यादा भरोसा नेताओं पर करने लगे है।
जानिए कितने TV चैनलों के मालिक खा रहे हैं जेल की हवा, इन पर हैं धोखाधड़ी के आरोप इसका बड़ा कारण है जिन लोगों के हाथ में मीडिया है वह पत्रकार नही बल्कि लोगों से पैसा ठगने वाले लोग हैं। इस बात की पुष्टि इस बात से होती है कि इसी दौर में सबसे ज्यादा मीडिया मालिक जेलों में बंद है जो अलग-अलग मामलों में फंसे हुए हैं।
जानिए कितने मीडिया मुग़ल खा रहे हैं जेलों की हवा
यह सिलसिला शुरू हुआ था सहारा टीवी समूह के मालिक सुब्रत रॉय से, जिनपर लोगों से पैसा लेकर उसे वापस न करने का आरोप है। अभी वह सहारा जेल में हैं वहीँ  पर्ल ग्रुप पी(-7 चैनल) के मालिक निर्मल सिंघ भंगू भी जेल में हैं। खबर भारती चैनल के मालिक बघेल सांई प्रसाद समूह के शशांक भापकर, महुआ ग्रुप के हिन्दी, भोजपुरी, बांग्ला भाषाओं के कई चैनलों के मालिक पी.के. तिवारी भी जेल में हैं। इसी तरह शारदा ग्रुप के चैनल-10 के मालिक सुदीप्तो सेन भी जेल में हैं। समृद्ध जीवन परिवार नामक चिटफंड कंपनी के मालिक और लाइव इंडिया नाम के चैनल के मालिक महेश किसन मोतेवार जेल में बंद हैं।
वहीँ एक और मीडिया मुग़ल स्टार के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी शीना बोरा हत्याकांड में अपनी पत्नी इंद्राणी के साथ बंद हैं। ओडिशा के कामयाब टीवी चैनल के मालिक मनोज दास और ओडिशा भास्कर न्यूज पेपर के मधुसुदन मोहंती भी सीबीआई की तलवार लटकी हुई है। सवाल मीडिया की लगातार गिरती हुई साख की है जिससे लोकतंत्र का चौथा खम्भा लगातार कमजोर होता जा रहा है। (इंडिया संवाद ब्यूरो)

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