भाजपा समर्थित भारतीय किसान संघ अब किसानों की मांगों को लेकर अपनी ही केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में जुट गया है।

भाजपा समर्थित भारतीय किसान संघ अब किसानों की मांगों को लेकर अपनी ही केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। कृषि उपज का लाभकारी मूल्य देने के सरकारी वायदे का पूरा नहीं करने के विरोध में किसान संघ ने चार मार्च से देश भर में जनजागरण अभियान चलाने का एलान किया है। इसके तहत सरकार के विरोध में देश भर में किसान ‘वादा निभाओ-किसान बचाओ’ का अभियान शुरू करेंगे।

भारतीय किसान संघ के यहां हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में किसानों से जुडे कई मसलों पर तीन प्रस्ताव पास किए गए। संघ के नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष आइएन बसवेगौडा और महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने यहां बताया कि अधिवेशन में आम राय से जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को उपज की पूरी कीमत दिलाने और सरकार से वायदा निभाने के संदर्भ में प्रस्ताव पास किए गए। उन्होंने बताया कि सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य देने का वायदा किया था। संसद की स्थायी समिति ने भी इस पर सहमति जताई थी। इसके बावजूद सरकार इसे लागू नहीं कर रही है।

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इसके विरोध में ही किसान संघ चार मार्च से अपना अभियान शुरू करेगा। राष्ट्रीय महामंत्री चौधरी ने बताया कि किसानों को दिए जा रहे अनुदान में कई तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें कई बार सामने आती हैं। इससे बचने के लिए किसानों को मिलने वाली अनुदान की राशि उनके खाते में ही जमा कराई जानी चाहिए।

उनका कहना है कि किसानों की सबसिडी कंपनियों को दिए जाने से ही इसमें भ्रष्टाचार पनप रहा है। किसान संघ ने रासायनिक खाद को जमीन की उर्वरा शक्ति को नष्ट करने और इससे उत्पादित वस्तुओं के जहरीली होने के मद्देनजर देश में जैविक खाद को बढ़ावा देने की मांग की है। चौधरी ने कहा कि पंजाब जैसे प्रदेश में खेती बर्बाद हो रही है और किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में देश में जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों में जैविक खाद से जुडे पाठयक्रम चलाए जाने चाहिए।

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चौधरी ने किसानों के लिए अलग से बजट और कैबिनेट मंत्री बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था पूरे देश में लागू होनी चाहिए। इसके साथ ही अलग से किसानों के लिए आयोग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि जीएम सीडस को बढ़ावा देकर सरकार देश के किसानों को दूसरों पर निर्भर करने की साजिश रच रही है।

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सरकार बड़ी कंपनियों के आगे घुटने टेक चुकी है। मानव जीवन के लिए बहुउपयोगी सरसों की फसल में भी जीएम सीड लाने की तैयारी की जा रही है जो किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जीएम सीड से नपुसंकता और कैंसर जैसे घातक रोग फैलने का अंदेशा रहता है। (Janstta)


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