जयपुर : केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में विश्व समुदाय के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि हमें पूर्ण विश्वास है कि सभी देश मिलकर इस खतरे का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकते हैं।

पठानकोट हमले का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि हमारे पास पूर्व में खुफिया सूचना होने की वजह हमारे सुरक्षा बलों ने इसके खतरे को कम कर दिया था। पठानकोट हमले के बाद सरकार आतंकवाद निरोधक व्यूह रचना की पुनर्समीक्षा कर रही है। उन्‍होंने कहा कि पठानकोट में एयरफोर्स फेस पर हमले के लिए जिम्‍मेदार आतंकी पाकिस्‍तान से ही आए थे। पड़ोशी देश (पाकिस्‍तान) में आतंकवाद पनप रहा है।

ज्यादातर आतंकवादी हमले पाकिस्तान की तरफ से होते हैं और उसे अपनी सरजमीं से गतिविधियां चला रहे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान आतंकियों और उनके संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करता है तो भारत उसके साथ खड़ा होगा।

सिंह ने बुधवार को यहां दो दिवसीय ‘काउंटर टेरेरिज्म कान्फ्रेंस 2016’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में आतंकवाद के बढ़ते हुए खतरे से लड़ने के लिए तैयार की गई राष्ट्रीय सुरक्षा व्यूह रचना के तहत इस तरह के वातावरण निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग को निर्बाध विकास एवं प्रगति करने के सभी अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि इसके लिए आवश्यक कानूनी एवं ढांचागत होमवर्क तैयार किया जा रहा है ताकि आतंकवाद से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि भारत में आतंकवाद से संबंधित मामलों का निपटारा करते समय इस बात पर जोर रहता है कि कोई बेगुनाह फंसे नहीं और कोई गुनहगार बचे नहीं।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवादियों एवं उनके संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करता है तो भारत पाकिस्तान का साथ देगा। इससे न केवल दोनों देशों के आपसी संबंधों में सुधार होगा बल्कि दक्षिण एशिया में भी शांति और स्थायित्व की स्थापना हो सकेगी। सिंह ने कहा कि आज विश्व परम्परागत आतंकवाद के अलावा साइबर टेरेरिज्म, नारको टेरेरिज्म और बायो टेरेरिज्म के खतरे का सामना कर रहा है और आतंकी समूहों द्वारा आधुनिक तकनीक, हथियार एवं संचार माध्यमों का उपयोग इसे और ज्यादा घातक और मारक बना रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद हाइड्रा के सिर जैसा दैत्य है जो विभिन्न माध्यमों से धन की आपूर्ति से फलफूल रहा है। आपूर्ति के इन माध्यमों पर अंकुश लगाना बड़ी चुनौती है।

उन्होंने आतंकवाद विरोधी सम्मेलन में कहा कि भारत में होने वाले अधिकांश हमले पाकिस्तान से होते हैं और पाकिस्तान को कुछ गंभीरता दिखानी होगी और आतंकी समूहों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। आईएसआईएस के संदर्भ में गृह मंत्री ने कहा कि इंटरनेट की शक्ति का दोहन करके और वैचारिक प्रोत्साहन के जरिए दाएश और अलकायदा जैसे आतंकी समूहों ने इंटरनेट पर बम बनाने और आत्मघाती हमलों से जुड़े साहित्य की बाढ़ ला दी है जिससे मौजूदा समय में ‘डू इट योरसेल्फ’आतंकवादियों का खतरा पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत को इस तरह की आशंका को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

सत्र की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि आतंकवाद विश्वव्यापी संकट बन चुका है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई जाति, मत, मजहब और सम्प्रदाय नहीं होता। आतंकवाद एक ऐसा जहर है जो सम्पूर्ण मानवता को नष्ट करने में लगा हुआ है। उन्होंने इस जहर को नष्ट कर मानव जीवन को सुखी बनाने की जरूरत जताई ताकि इससे आने वाली पीढियों को सुरक्षित समाज मिल सके। राज्यपाल ने कहा कि उच्च मनोबल से लबरेज भारत का युवावर्ग आतंकवाद से निपटने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि समस्या के निराकरण के लिए हम सबको मिलकर मानवता को संरक्षित करने का प्रण लेना होगा। सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में मलेशिया के उप गृह मंत्री दातुक नूर जजलान मोहम्मद ने कहा कि मलेशिया विश्व स्तर पर आतंकवाद से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों में सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस दिशा में मलेशिया में लाए गए विभिन्न प्रभावी कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मलेशिया पेरिस, जकार्ता, इस्ताम्बुल और हर उस शहर के साथ खड़ा है जिसने आतंकवाद का दंश झेला है। साथ ही वह भारत के साथ भी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग देगा।


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