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लखनऊ | राजनीति में ऐसे बहुत कम लोग है जो केवल देश सेवा के लिए इस क्षेत्र में आये है. ज्यादातर लोग राजनीती के जरिये अपना कारोबार आगे बढ़ाते है, अपनी आने वाली पीढ़ी को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाते है. हमारे चुने हुए प्रतिनिधि चाहे वो सांसद हो या विधायक, सदन में अपना वेतन बढ़ाने के लिए हमेशा तत्पर रहते है. लेकिन कुछ ऐसे भी प्रतिनिधि है जो नही चाहते की उनका वेतन बढे.

लखनऊ में एक यूथ कार्यक्रम में पहुंचे बीजेपी सांसद वरुण गाँधी , उन सांसदों में से एक है जिहोने संसद में यह लिखकर दिया था की उनका वेतन न बढाया जाए. इस कार्यक्रम में बोलते हुए वरुण गाँधी ने सभी मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी. राजनीती में बढ़ते दौलत के प्रभाव पर बोलते हुए वरुण गाँधी ने कहा की अब राजनीती में भी दौलत और रसूख वालो का कब्ज़ा हो गया है.

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पहले राजनेताओ और आज के राजनेताओ की तुलना करते हुए वरुण ने कहा की पहले देश के दिग्गज नेताओ की की कुछ सोच होती थी. वो अपनी सोच के बल पर दुनिया में जाने जाते थे. लेकिन आज कल के नेताओ से आप अगर पानी, बिजली, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और अन्य किसी गंभीर मुद्दे पर राय पूछो तो शायद ही उनकी तरफ से जवाब मिले.

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वरुण ने आगे कहा मैं देश में सत्ता परिवर्तन की बजाय व्यवस्था परिवर्तन का हिमायती हूँ. देश की व्यवस्था ऐसी है की एक किसान को इसलिए जेल में डाल दिया जाता है क्योकि वो बच्चे की पढाई के लिए लोन का पैसा नही चूका पाया जबकि विजय माल्या जैसे लोग जो हजारो करोड़ रूपए लेकर देश से भाग गए, उनका कुछ नही बिगड़ता. हमें इस व्यवस्था को बदलना है.

सांसदों के बारे में बोलते हुए वरुण ने कहा की हमारे देश के ज्यादातर सांसद करोडपति है. हमारे सांसदों की औसत संपत्ति 14 करोड़ रूपए है. वो संसद में महंगी महंगी गाडियों में आते है. लेकिन ये करोडपति सांसद अपना वेतन बढवाने के लिए पूरा जोर लगाते है. उस समय मुझे बढ़ी शर्म आती है. इसलिए मैंने खुद लोकसभा स्पीकर को लिख कर दिया की मेरा वेतन न बढाया जाए.

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वरुण गांधी ने अपने सरनाम का जिक्र करते हुए कहा की अगर मेरे नाम से गांधी हटा दिया जाए तो मैं भी भीड़ में बैठकर किसी का भाषण सुन रहा होता. इसलिए आप लोगो को सलाह देता हूँ की अगर आपको तेज चलना है तो अकेले चलो और अगर आपको दूर तक जाना है तो लोगो को साथ लेकर चलो .


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