सम्भल। जगह-जगह मुसलमानों एवं दलितों पर हो रहे अत्याचार उत्पीड़न एवं बीफ जैसे झूठे उत्पीड़न नौजवानों की हो रही हत्या के खिलाफ मुस्लिम स्टूडेण्ट आॅर्गनाईजेशन आफ इण्डिया सहित विभिन्न संगठनों ने एकत्र होकर मौन जुलूस निकालकर ज्ञापन सौपा।
बुधवार को एक उमंग जन सेवा समिति, मुस्लिम स्टूडेण्ट आॅर्गनाईजेशन आफ इण्डिया, हयूमन रिलीफ सोसायटी, गुलामाने साबरी कमेटी, हयूमन केयर चेरिटेबल ट्रस्ट, सामाजिक जागरूकता मिशन, अब्बासी वैलफेयर सोसायटी,अंजुमने वारसिया, रज़ा एजुकेशनल वैलफेयर सोसायटी, अंजुमन फैज़ाने मखदूम अशरफ, जन समस्या निवारण संगठन, नसीर वैलफेयर सोसायटी, आल इण्डिया उलेमा एण्ड मशाईख बोर्ड शाखा, अंजुमने अशफाकिया,बदलाव फाउण्डेशन अलीगढ़, एएमयू के, एमजीएम कालिज के छात्रो ने संयुक्त रूप से  नगर पालिका परिषद के मैदान में एकत्र होकर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अनुमति मिलने के बाद एक मौन जुलूस निकाला जो शकंर कालिज चैराहा, असपताल रोड, यशोदा चैराहा, बहजोई मार्ग, चन्दौसी चैराहा, मुरादाबाद आदि मार्गो से होता हुआ उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति के नाम सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम राशिद अली खां को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि देश भर में जगह-जगह धर्म जाति के नाम पर हत्याये हो रही हैं जिससे मुस्लिम एवं दलित समुदाय स्वंय को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। देश में हिन्दू और मुसलमान के बीच नफरत फैलाने का काम करने वाले असामाजिक तत्वों पर समय रहते कार्यवाही की जाये। जिससे कि देश में आपसी भाईचारा बना रहे। जेएनयू के लापता छात्र नजीब प्रकरण में चल रही सीबीआई जांच में तेज़ी लाई जाये तथा बल्लभगढ़ निवासी जुनैद के हत्यारों को फांसी दिलाई जाये। अन्य मामलो में दोषियों के विरूद्व कड़ी कार्यवाही की जाए और देश के अल्पसंख्यक मुसलमानों व दलित समाज के साथ घटित हो रही घटनाओं पर अंकुश लगाया जाये। इसके साथ ही हम अमरनाथ यात्रा पर हुए हमले की कड़े शब्दो में निन्दा की गई।
इस दोरान मुस्लिम स्टूडेण्ट आॅर्गनाईजेशन आफ इण्डिया की सभंल यूनिट उत्तर प्रदेश सयोंजक वसीम अख्तर बरकाती के साथ मार्च मे शामिल रही। मार्च मे चोo  मुदब्बिर अली अलीग, जकीउर्रहमान ओर फरजन्द अली वारसी ने अहम भूमिका निभाई। इस दोरान फेजान अख्तर बरकाती, मो जरीफ, मो मोहसिन, फेजान साद आदिल, शकील अहमद एड0, मौ0 मुकीम, आमिर सुहैल, इंतेज़ार हुसैन साबरी, आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे। इस दौरान माथे व कलाई पर काली पट्टी भी बांधी गई।

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