इस्लामिक इतिहास के चलते ताजमहल को निशाना बना कर ध्रुवीकरण की कोशिशों में लगी बीजेपी के लिए स्थित उस समय हाथ से निकल गई जब आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आकर मौर्चा संभाला.

ओवैसी ने ताज पर हो रही बेतुकी बयानबाजी को लेकर सीधे प्रधानमंत्री को निशाने पर लिया, जिसके चलते पार्टी को खुद ताजमहल आ रहे पार्टी नेताओं के बयान से खुद को अलग करना पड़ा. साथ ही संगीत सोम भी बाद में अपने उस बयान से पल्ला झाड़ते नजर आए जिसमे उन्होंने ताजमहल को  ‘भारतीय संस्कृति पर धब्बा’ करार दिया था, साथ ही इसकों बनाने वाले मुग़ल शासकों को गद्दार कहा था.

ध्यान रहे ओवैसी ने सीधा सवाल करते हुए प्रधान मंत्री से पूछा कि अगर ताज महल गद्दारों ने बनवाया तो लाल किला भी गद्दारों ने बनवाया, जिस पर मोदी हर साल तिरंगा फहराते है. उन्होंने सवाल किया क्या ऐसे में अब मोदी इस पर तिरंगा फहराना बंद करेंगे? क्या मोदी और योगी देसी और विदेशी पर्यटकों के ताज में आने पर रोक लगायेंगे. ओवैसी ने कहा कि अगर मुगल गद्दार थे तो हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी ने 25 लाख का सूट का पहनकर ओबामा को चाय क्यों पिलाई थी?

ओवैसी ने ताजमहल के जरिए पीएम मोदी की उस अंतराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाया, जिसे आज-तक बीजेपी बड़ी कामयाबी के रूप में पेश करती आई है. जिसकी गवाही अंतराष्ट्रीय समाचार पत्रों में ताजमहल से जुडी हर खबर में ओवैसी का जिक्र शामिल है.

ऐसे में अब बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव सरदार आरपी सिंह ने कहा कि ताज महल न केवल देशी-विदेशी पर्यटकों का आकर्षण केंद्र है बल्कि वह मुगलकालीन स्थापत्य कला का एक जीता जागता और बेजोड़ नमूना है, जिसकी कद्र पूरी दुनिया करती है.

सिंह ने कहा कि संगीत सोम जो कह रहे हैं वह उनका विचार है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ताज महल दुनिया के सात अजूबों में शामिल है.


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